
पुणे। अस्तित्व में आने से पहले ही 'शिव वड़ापाव' को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरम हो गई है। शिवसेना ने अपनी इस योजना का विरोध करने के लिए राज्य के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल की आलोचना की है। शिवसेना ने पाटिल को चेतावनी दी कि वह सेना की दुकानों से वड़ापाव की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश न करें।
पाटिल ने शिवसेना की इस प्रस्तावित योजना का यह कहते हुए विरोध किया था कि इससे मराठा गौरव के प्रतीक शिवाजी महाराज का अपमान होगा। पार्टी के मुख पत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा गया है कि शिवसेना आर्थिक रूप से कमजोर मराठी युवाओं को रोजगार देने के लिए यह योजना ला रही है। इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने संपादकीय में इस योजना को मराठी युवाओं को स्वरोजगार देने वाला सहकारिता आंदोलन बताया। ठाकरे ने पाटिल से सवाल किया कि क्या युवाओं को एनसीपी नेताओं की शराब फैक्ट्रियों में बनने वाले उत्पादों को बेचने की दुकानें खोलनी चाहिए?
ठाकरे ने कहा, 'महाराष्ट्र में कानून के उल्लंघन, बिजली की कमी और बेरोजगारी सरीखी कई समस्याएं हैं। शिव वड़ापाव पर प्रतिबंध लगाने के बजाय पाटिल को इन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।' संपादकीय में कहा गया है कि सेना 'शिव वड़ापाव' को बाजार में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिवसेना का दावा है कि दुकानों में पहुंचने से पहले ही यह लोकप्रिय हो गया है।
गौरतलब है कि शिवसेना ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि उसकी स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर और अच्छी गुणवत्ता वाले वड़ापाव बनाने की योजना है। इन्हें सेना द्वारा प्रायोजित दुकानों के जरिए बेचा जाएगा।