
लखनऊ। मुख्यमंत्री मायावती, भाजपा के कद्दावर नेता कल्याण सिंह, सपा के बागी सांसद राजबब्बर और केंद्रीय राज्य मंत्री जतिन प्रसाद में आखिर क्या समानता है? सवाल अटपटा लग सकता है लेकिन नए परिसीमन के आधार पर लोकसभा चुनाव होने के कारण इन सभी को अपने लिए नए क्षेत्रों की तलाश करनी पड़ रही है।
चार दशक से ज्यादा के अपने लंबे राजनीतिक सफर के दौरान पहली बार लोकसभा पहुंचे भाजपा के कद्दावर नेता कल्याण सिंह को दूसरी बार लोकसभा पहुंचाने के लिए अब बुलंदशहर सीट उपलब्ध नहीं होगी, क्योंकि यह सीट अब सुरक्षित हो गई है। वह अब एटा से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है। उन्होंने इशारा करते हुए कहा कि एटा के तमाम लोगों ने उनसे वहां से चुनाव लड़ने के लिए अनुरोध किया है।
बसपा सुप्रीमो मायावती की स्थिति भी काफी मजेदार है। वह वर्ष 1989 में पहली बार बिजनौर से और फिर 1996, 1998, 1999 और वर्ष 2004 में अकबरपुर से चुनकर लोकसभा पहुंची। नई व्यवस्था में बिजनौर और अकबरपुर [अब नया नाम अंबेडकरनगर] दोनों ही सुरक्षित के स्थान पर सामान्य हो गई है। ऐसे में मायावती को भी लोकसभा जाने के लिए नए क्षेत्र की तलाश है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे जितेंद्र प्रसाद के पुत्र और हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए गए जतिन प्रसाद भी अब अपने परिवार की पुरानी सीट शाहजहांपुर से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। शाहजहांपुर सीट के सुरक्षित हो जाने के बाद अब उन्हें नए क्षेत्र की तलाश है और उनके नजदीकियों का कहना है कि वह नई गठित हुई धौरहरा सीट से भाग्य आजमाएंगे।
दो बार आगरा से लोकसभा पहुंचने वाले राजबब्बर के लिए तो हालात और भी कठिन है। उन्हें तो नई सीट के साथ-साथ नए राजनीतिक दल की भी तलाश है, क्योंकि सपा से उनका नाता टूट चुका है और आगरा सीट भी सुरक्षित हो गई है। खुद राजबब्बर आगे के बारे में संकेत देते हुए कहते है कि वह राष्ट्रीय लोकदल में जा सकते है और उनकी निगाहें नवसृजित फतेहपुर सीकरी सीट पर है।
चुनौती सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के सामने भी है। इटावा लोकसभा सीट अब सुरक्षित हो गई है। यद्यपि वह कभी इस सीट से लोकसभा चुनाव नहीं लड़े लेकिन गृह जनपद होने के नाते वह इस सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रखना चाहेंगे और बदले हालात में यह खासा चुनौतीपूर्ण होगा।
खुर्जा से भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को भी नई सीट की तलाश है। चार बार से लगातार खुर्जा सीट जीत रहे अशोक प्रधान इस सीट को समाप्त कर दिए जाने के बुलंदशहर से चुनाव लड़ेंगे जो अब सुरक्षित हो गई है। बहराइच की सपा सांसद रूआब सईदा भी बहराइच सीट के सुरक्षित हो जाने के कारण किसी नए ठिकाने की तलाश में है।