
बागडोगरा [प्रशांत मिश्र]। आतंकवाद पर काबू पाने के लिए देश में क्या एफबीआई जैसी एक संघीय एजेंसी बनाने का समय आ गया है? प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने माना कि आतंकवाद को रोकना किसी एक राज्य के बूते की बात नहीं और अब इस एजेंसी की स्थापना पर विचार होना चाहिए। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अभी तक राज्य ऐसी केंद्रीय एजेंसी के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं।
भूटान की दो दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद डा. सिंह शनिवार को यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने परमाणु करार के मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्र के समर्थन की भी सराहना की। उनका कहना था कि डा. कलाम और मिश्र की तरह और लोग भी धीरे-धीरे करार के लिए आगे आएंगे।
आतंकवाद के मुद्दे पर डा. सिंह काफी मुखर थे। उन्होंने कहा कि कोई राज्य आतंकवाद से अपने स्तर पर अकेले नहीं लड़ सकता। आतंकवाद देश की सामूहिक समस्या है और सबको मिलकर इससे निपटना होगा। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर राज्यों का रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार फेडरल एजेंसी के गठन पर विचार को तैयार है लेकिन राज्य बहुत उत्सुकता नहीं दिखा रहे। उन्हें लगता है कि ऐसी कोई एजेंसी बनी तो राज्य की कानून व्यवस्था उनके हाथ से निकल कर केंद्र पहुंच सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों को समझना चाहिए कि नारकोटिक्स, सफेदपोश अपराध और आतंकवाद संघीय जांच के विषय हैं।
डा. सिंह का मानना था कि आतंकी सांप्रदायिक सद्भाव नष्ट करने के साथ ही भारत-पाकिस्तान में सामान्य हो रहे रिश्तों में भी खलल डालना चाहते हैं। इस दृष्टि से विदेश मंत्री और विदेश सचिव की शीघ्र प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा महत्वपूर्ण होगी। इस प्रश्न पर कि क्या बनारस, अजमेर और अब जयपुर के विस्फोटों को खुफिया तंत्र की विफलता मान लिया जाए, प्रधानमंत्री का जवाब था कि आतंकवादी तकनीकी रूप से बहुत समर्थ हैं और उन पर काबू पाने के हमें नए तरीके ईजाद करने होंगे। उन्होंने कहा कि देश का गुप्तचर तंत्र कमजोर नहीं है। लोग सिर्फ घटनाएं देखते हैं लेकिन उन्हें यह भी देखना चाहिए कि इसी तंत्र की बदौलत कितनी अधिक वारदातें रोक दी गईं। उन्होंने कहा कि खुफिया महकमे के पुनर्गठन की अभी कोई जरूरत नहीं है।
धैर्य रखें, महंगाई कम होगी
प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार के पास जादू की छड़ी नहीं है कि महंगाई हर हफ्ते कम दिखने लगे। लोगों को भी कुछ धैर्य रखना चाहिए। लोग बस कुछ हफ्ते इंतजार करें, सरकार पूरी कोशिश कर रही है और जल्दी ही महंगाई जरूर कम होगी। डा. सिंह ने महंगाई के लिए पिछले एक साल में स्टील, कच्चे तेल और सीमेंट की बेतहाशा बढ़ी कीमतों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, संप्रग सरकार के गठन के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 35 डालर प्रति बैरल थी जबकि आज यह 122 डालर है। इसके बाद भी सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिशें कर रही है। हमने स्टील कम्पनियों से बात की है। उन्होंने कीमतें कम करने का विश्वास दिलाया है।
डा. सिंह का कहना था कि मई से सितंबर तक वैसे भी हर साल महंगाई बढ़ती है। अगर मानसून अच्छा रहा तो दाम और भी कम होंगे। प्रधानमंत्री का कहना था कि सरकार मुद्रास्फीति को पांच से 5.5 प्रतिशत के बीच रखने की कोशिश में है। उन्होंने कहा,मैं लोगों से धैर्य बनाए रखने की विनती करता हूं, हमने कई कदम उठाए हैं और उनके नतीजे जल्दी ही मिलेंगे।