
अमृतसर। पंजाब में शनिवार को बडे़ राजनीतिक घटनाक्रम में के तहत राज्य के जिला परिषद और ब्लाक समितियों के चुनाव के दौरान लोकतंत्र की हत्या के विरोध में कांग्रेस के 43 विधायकों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के दौरान भारी हिंसा के बीच राज्य में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल [शिअद] को मिली भारी जीत के विरोध में विधानसभा में विपक्ष की नेता और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेन्द्र कौर भट्ठल समेत सभी 43 विधायकों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह से संपर्क नहीं किया जा सका है। कांग्रेस के 41 विधायकों ने भट्ठल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जबकि शेरसिंह और जोगिन्द्रपाल जैन ने अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को फैक्स से भेजा है। विधायकों ने त्यागपत्र में 22 मई को होने वाले अमृतसर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव तथा 26 मई को होने वाले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के दौरान अकाली दल की ओर से लगातार किए जा रहे आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन और मतदान के दौरान हिंसा तथा धांधली की आशंका व्यक्त की है।
भट्ठल ने हाल में कई चरणों में होने वाले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ अकाली दल की अराजकता के खिलाफ कांग्रेस के विधानसभा से अलग होने की धमकी दी है। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि अब भट्ठल पर यह निर्भर करता है कि वह कब पार्टी आलाकमान से विचार-विमर्श कर विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे सौंपेगी। विधायकों ने कहा है कि जिला परिषद और ब्लाक समितियों के चुनाव के बाद बडे़ पैमाने पर हिंसा की घटनाओं के दौरान न केवल कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया बल्कि अकाली दल की सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को भी नहीं छोड़ा गया। उन्होंने कहा है कि चुनाव के दौरान तैनात पंजाब पुलिस की मदद से आतंक का माहौल बनाया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कल राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति को पूरी तरह से ध्वस्त होने और सरकार की विफलताओं को लेकर पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की थी। इस सिलसिले में दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस के एक शिष्टमंडल ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को एक ज्ञापन भी दिया था।