
जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और संासद रामदास अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने राज्य के पांच जिलों के गुर्जरों के विकास के लिए पहले चरण की रिपोर्ट शनिवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सौंप दी। रिपोर्ट में 282 करोड़ रुपये के पैकेज की सिफारिश की गई है।
अग्रवाल ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य के अलवर, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर और झालावाड़ के करीब आठ से 10 लाख गुर्जरों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए 282 करोड़ रुपये के पैकेज की सिफारिश राजस्थान सरकार से की गई है। उन्होंने बताया कि सिफारिश का प्रतिवेदन गुर्जर नेताओं की मौजूदगी में मुख्यमंत्री को सौंपा गया। उन्होंने बताया कि पैकेज की राशि गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा मुहैया कराने के लिए स्कूल खोलने उनके गांवों को मुख्य मार्गो से जोड़ने पेयजल के लिए नलकूप खोदने तथा स्वास्थ्य सुविधा देने पर खर्च करने की सिफारिश की गई है।
गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के मुद्दे पर राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जसराज चोपड़ा की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश सरकार को पिछड़े गुर्जरों के उत्थान के लिए विशेष पैकेज देने की सिफारिश की थी। राज्य सरकार ने इस कमेटी की सिफारिश पर गत 21 जनवरी को रामदास अग्रवाल की अध्यक्षता में एक और समिति गठित की थी।
अग्रवाल ने बताया कि 282 करोड़ रुपये का पैकेज संबंधित विभाग के बजट से अलग होगा। राज्य सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2008-09 के बजट में संबंधित विभाग के लिए 181 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इसमें 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि नहीं थी। उन्होंने बताया कि राजस्थान में करीब 20 लाख गुर्जर हैं। इनमें से 10 लाख गुर्जर इन पांच जिलों में हैं। शेष जिलों के गुर्जरों को भी मुख्यधारा में लाने के लिए समिति अध्ययन कर राजस्थान सरकार को सिफारिश सौंपेगी।
अग्रवाल के अनुसार मुख्यमंत्री ने गत मई में हुए गुर्जर आंदोलन के दौरान मारे गए 26 गुर्जरों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने, घायलों को मुआवजा देने और गुर्जर नेताओं पर लगे मुकदमों को वापस लेने के विचाराधीन मामलों का शीघ्र समाधान करने का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग को लेकर गत 30 मई को पाटौली में जमकर हिंसा हुई थी। हिंसक वारदातों में 26 लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। करीब एक सप्ताह से अधिक समय तक चले आंदोलन में करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति नष्ट हो गई थी। सरकार ने गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के मुद्दे पर पूर्व न्यायाधीश जसराज चोपड़ा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी।