
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए सोमवार को केंद्र व प्रदेशों में संगठनात्मक फेरबदल का आगाज कर दिया। साथ ही हाईप्रोफाइल घोषणापत्र और प्रचार अभियान समिति भी बना दी गई है। कांग्रेस आलाकमान ने हिमाचल प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति भी कर दी है।
हिमाचल प्रदेश में विप्लव ठाकुर की जगह ठाकुर कौल सिंह को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपी गई है। ठाकुर ने हिमाचल विधानसभा चुनाव की हार के बाद इस्तीफा दे दिया था। गुजरात में पूर्व मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल के बेटे और एआईसीसी सचिव सिद्धार्थ पटेल को भरत सोलंकी की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा गुजरात में तुषारभाई चौधरी और कुंअरजीभाई मोहनभाई बावलिया दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं। तमिलनाडु में कृष्णास्वामी की जगह पूर्व केन्द्रीय मंत्री के वी थंगबालू को प्रदेश कांग्रेस का नया मुखिया बनाया गया है। बिहार, पंजाब और महाराष्ट्र सहित कुछ अन्य प्रदेशों के अध्यक्षों को बदलने पर राय-मशविरा अब भी जारी है।
लोकसभा के लिए चुनाव घोषणापत्र समिति में तकनीकी रूप से किसी को अध्यक्ष नहीं बनाया गया है मगर विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी स्वाभाविक रूप से सूची में पहले नंबर हैं और इसकी अगुवाई वे ही करेंगे यह तय है। अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी, पी चिदंबरम, एसएम कृष्णा, मणिशंकर अय्यर, वीरप्पा मोइली, मीरा कुमार, मार्गरेट अल्वा, किशोर चंद्र देव, सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजीत जोगी, सलमान खुर्शीद, जयराम रमेश, अर्जुन सेनगुप्ता, मुकुट मिथी, परमेश्वर, राधाकांत नायक, मुकुल वासनिक और अर्जुनसेन गुप्ता जैसे दिग्गजों को घोषणापत्र तैयार करने वाली समिति में रखा गया है।
लोकसभा के चुनावी अभियान की कमान जाहिर तौर पर बतौर अध्यक्ष सोनिया गांधी संभालेगी। प्रणब मुखर्जी को चुनाव अभियान समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अर्जुन सिंह, एके एंटनी, वीरप्पा मोइली, वीरभद्र सिंह, प्रियरंजन दासमुंशी, वायलार रवि, कमलनाथ, अंबिका सोनी, मीरा कुमार, शकील अहमद के अलावा राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी महासचिव शामिल हैं। साथ ही पार्टी कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, मीडिया, प्रकाशन व प्रचार विभाग के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह, पंचायती राज विभाग के समन्वयक मणिशंकर अय्यर को भी इसमें जगह दी गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों व विधायक दल के नेताओं को उनके राज्यों के मसले पर चर्चा के दौरान इसमें शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा। एआईसीसी और बाकी बचे अन्य प्रदेशों में संगठनात्मक हेरफेर को अगले कुछ दिनों के भीतर ही अंजाम दे दिया जाएगा।