
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। संप्रग और राजग में चल रहे शह मात के खेल में केंद्र बिंदु बना झामुमो खुद अंदरुनी मतभेदों में घिर गया है। पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन अब तक चुप होकर स्थिति को तौल रहे हैं, जबकि उनके सांसद अपनी सुविधानुसार राजग और संप्रग की सिफारिश करने में जुटे हैं। कोई फैसला शनिवार तक आने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक शिबू सोरेन और उनके दो सांसद भाजपा के साथ जाने के इच्छुक हैं। शिबू के सलाहकार मान रहे हैं कि भाजपा के साथ जाने पर उन्हें दो साल तक झारखंड की गद्दी मिल सकती है।
भाजपा और कांग्रेस की ओर से मिले प्रस्ताव के बाद झामुमो के सांसद नया समीकरण बनाने में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि सांसद व्यक्तिगत हित साधने के लिए अभी सबसे माकूल समय मान रहे हैं। बताते हैं कि हेमलाल मुर्मू व टेकलाल महतो केंद्र की राजनीति में कुछ सुविधा पाने की होड़ में हैं। शायद इसी कारण महतो ने कोई फैसला होने से पूर्व संप्रग के समर्थन की बात कर केंद्र में अपना नंबर बढ़ा लिया है। जबकि उड़ीसा से आने वाले झामुमो सांसद सुदाम मरांडी को लगता है कि चुनावी माहौल में कांग्रेस की सत्ता विरोधी लहर से दूर रहना ही ज्यादा मुनासिब होगा। लिहाजा वह बार बार यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि कांग्रेस ने गुरुजी को बहुत कष्ट दिया है। चौथी सांसद सुमन महतो पूरी तरह सोरेन के साथ हैं। जबकि खुद सोरेन तय नहीं कर पा रहे हैं। वह भाजपा पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रहे हैं तो कांग्रेस के व्यवहार से दुखी हैं। ऐसे में झामुमो ने अपनी ओर से यह फैलाना शुरू कर दिया है कि केंद्र में मंत्री के साथ-साथ राज्य में भी मुख्यमंत्री पद मिले तभी पूरी भरपाई हो पाएगी। जाहिर है कि झामुमो पूरा मोल भाव कर अपनी कीमत वसूलेगा। शुक्रवार की देर रात या शनिवार को झामुमो सांसदों की बैठक हो सकती है।