राजग ने छेड़ी मनोवैज्ञानिक जंग

 
Jul 18, 10:31 pm

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकार बचाने व गिराने की जंग में संख्या बल जुटाने के साथ मनौवैज्ञानिक लड़ाई भी तेज हो गई है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी खुलकर मोर्चा संभालते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से तत्काल इस्तीफा देकर नया जनादेश लेने की मांग कर डाली है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार बचाने के लिए प्रधानमंत्री व उनके सहयोगी लोकतंत्र व राजनीतिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई रहे हैं, उससे देश के लोगों का संसदीय व्यवस्था से विश्वास डगमगा सकता है। पार्टी ने पंजाब में धर्म के नाम पर कांग्रेस की राजनीति की भी तीखी आलोचना की है।

कांटे के मुकाबले में सरकार की असीम ताकत से जूझ रहे विपक्ष ने आंकड़ों के जुटाने के साथ सरकार पर मनौवैज्ञानिक हमले शुरू कर दिए हैं। दो दिन पहले आगे बढ़कर सरकार गिराने का मोर्चा संभालने वाले राजग ने अब रणनीति के तहत अपने को थोड़ा नरम किया है। यह उसकी अपनी ताकत बढ़ाने व संप्रग को ढीला करने की कोशिश है। इसके विपरीत उसने सरकार को राजनीतिक मर्यादा, नैतिकता व संसदीय लोकतंत्र के मोर्चो पर कठघरे में खड़ा किया है।

महासचिवों के साथ रणनीतिक मंथन करने के बाद राजनाथ ंिसह ने मनमोहन सिंह पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय खुद मोलभाव का अड्डा बन गया है। समर्थन के बदले में केंद्र सरकार के सचिव फाइलें लेकर एक दल विशेष को उपकृत कर रहे हैं। इससे जन सामान्य का संसद से विश्वास डगमगा सकता है और लोकतंत्र से लोगों की आस्था टूट सकती है। बेहतर होगा कि प्रधानमंत्री इस्तीफा देकर नया जनादेश लें। मौजूदा स्थितियों का एकमात्र हल नए चुनाव ही हैं। उन्होंने झामुमो से अपील की है कि वह ऐसे नाजुक मौके पर देश हित में सरकार के खिलाफ मतदान करे।

इसी बीच, भाजपा ने अकाली दल को तोड़ने के लिए कांग्रेस द्वारा लिए जा रहे धर्म के सहारे पर भी तीखी प्रतिक्रिया जताई है। लोकसभा में भाजपा के उप नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि जिस तरह पंजाब में सिख प्रधानमंत्री व पगड़ी की लाज रखने के लिए कांग्रेस नेता बयान दे रहे है और पत्र लिख रहे है, वह संविधान व देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है।

राजग की तरफ से बयानबाजी के साथ उसके मुख्यमंत्रियों ने भी मोर्चा संभाल लिया है और अपने राज्यों में अपना घर संभालने के साथ विरोधियों के गढ़ों में सेंध लगानी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि गुरुवार को हुई राजग मुख्यमंत्रियों की बैठक में आडवाणी ने सबसे पहले अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल को मौका दिया। बादल ने साफ कर दिया कि जब तक वे जिंदा हैं अकाली कांग्रेस के साथ कतई नहीं जाएंगे। इसके बाद शुक्रवार को अकाली दल ने व्हिप भी जारी कर दिया। केंद्र की संप्रग सरकार के भेदभाव से आजिज आ चुके नीतीश कुमार व नवीन पटनायक ने भी सरकार को पटखनी देने के लिए पूरी ताकत लगाने की बात कही थी।




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