सोमनाथ का मसला माकपा के हवाले

 
Jul 19, 03:05 am

नई दिल्ली [टी. ब्रजेश]। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के इस्तीफे का फैसला भले ही माकपा ने उनके विवेक पर छोड़ दिया हो लेकिन पार्टी नेतृत्व इस मामले में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने के मूड में कतई नहीं है। संकेत हैं कि सरकार के विश्वास मत यानी 22 जुलाई को सोमनाथ के लोकसभा की अध्यक्षता करने को माकपा आलाकमान हल्के में नहीं लेगा।

शनिवार से यहां शुरू हो रही दो दिवसीय केंद्रीय समिति की बैठक इस लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार माकपा की नीति-नियामक संस्था तय कर सकती है कि पार्टी लाइन का उल्लंघन करने पर वरिष्ठ कामरेड के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाएं। कड़े तेवर की बानगी तो माकपा महासचिव प्रकाश करात ने बैठक से एक दिन पहले ही दे दी। एक अखबार को दिए साक्षात्कार में करात ने सोमनाथ को दो टूक संदेश दे दिया है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा अध्यक्ष का पद राजनीतिक होता है और उस पर आसीन व्यक्ति किसी न किसी दल का ही होता है। माकपा के सूत्र इसे सोमनाथ पर दबाव बनाने की करात की कोशिश के तौर पर ही देख रहे हैं।

इधर शुक्रवार को माकपा ने अपने सभी सांसदों को सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए व्हिप जारी कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष होने के नाते सोमनाथ का नाम उन सांसदों की सूची में शामिल नहीं किया गया है जिन्हें यह व्हिप जारी किया गया है। पार्टी के मुख्य सचेतक रूपचंद पाल का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष पद व्हिप के दायरे से बाहर होता है। लेकिन अगर सोमनाथ पद छोड़ देते हैं तो यह व्हिप उन पर भी लागू होगा। संकेत साफ हैं यदि सोमनाथ लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ते हैं तो सरकार के खिलाफ वोट देने से बचने के लिए उन्हें सदन की सदस्यता को अलविदा करना होगा। भाकपा ने भी अपने दस सांसदों के लिए व्हिप जारी कर सरकार के खिलाफ वोट देने को कहा है।

करात की सोच है कि सरकार के खिलाफ वोट देने के वामदलों के फैसले को भाजपा का साथ देने की कोशिश बताने की शुरुआत सोमनाथ की वजह से हुई। इसके बाद और कामरेडों को विरोध का मौका मिल गया जिसमें पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री सुभाष चक्रवर्ती भी शामिल हैं।

इधर, भाजपा के साथ सरकार के खिलाफ मतदान में हिस्सा लेने पार्टी के भीतर बवाल मचा हुआ है। केंद्रीय समिति में इस मुद्दे पर उभरे मतभेद को पाटने की भी पुरजोर कोशिश की जाएगी। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय समिति में बंगाल के 18 सदस्यों में से कई ने भाजपा के साथ विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट देने के पोलित ब्यूरो के फैसले पर असहमति जताई है। केंद्रीय समिति की चर्चा में करात उन्हें भी मनाने का प्रयास करेंगे क्योंकि इस फैसले पर समिति की मुहर लगनी जरूरी है।




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