
मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भले ही मराठा छत्रप शरद पवार को अपने कुनबे की चौकीदारी सौंप रखी हो लेकिन पवार अपना घर भी पूरी तरह संभाल पाएंगे, इसमें संदेह है। माना जा रहा है कि कोल्हापुर से उनकी पार्टी के सांसद सदाशिवराव मांडलिक संसद में संप्रग के विरोध में मतदान कर सकते हैं।
कोल्हापुर की स्थानीय राजनीति में मांडलिक के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी महाराष्ट्र के शिक्षा राज्यमंत्री हसन मुशरिफ माने जाते हैं। दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। अपनी ही पार्टी के दो नेताओं की जंग में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार मांडलिक के बजाय हसन मुशरिफ का साथ देते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार की कृपा मांडलिक के बजाय मुशरिफ पर इसलिए रहती है क्योंकि मुशरिफ को महलव देने से एक तीर से कई शिकार किए जा सकते हैं। जैसे मुशरिफ पश्चिम महाराष्ट्र के मराठी मुस्लिम नेता हैं। वह सहकारिता आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं। वह कोल्हापुर के उस कागल तालुका का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां के मराठों की बागडोर एक श्रेष्ठ मराठा नेता संजय गाडगे के हाथ में है। इनके पूर्वज छत्रपति शिवाजी के निकट सहयोगियों में माने जाते हैं।
सदाशिवराव मांडलिक भी मराठा नेता है। पवार मांडलिक और गाडगे जैसे मराठों का कद अधिक ऊंचा नहीं होने देना चाहते। साथ ही पश्चिम महाराष्ट्र के एक मराठी मुस्लिम नेता को आगे बढ़ाकर कई कोटे एक साथ पूरे कर लेना चाहते हैं। इसलिए पिछले कुछ समय से वह मुशरिफ बनाम मांडलिक जंग में मुशरिफ की पीठ ठोंकते नजर आ रहे हैं। पवार के इस रवैये से तंग मांडलिक वास्तव में कांग्रेस के साथ जाना चाहते थे लेकिन उन्हें शंका है कि कांग्रेस अपने सहयोगी राकांपा को नाराज करके उन्हें अगले चुनाव में इसी सीट से टिकट दे पाएगी। शायद इसीलिए वह विश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट देने का मन बना रहे हैं।