गुरुजी सरकार के पक्ष में, अजीत फिसले

 
Jul 20, 07:08 pm

नई दिल्ली। संसद में विश्वासमत की पूर्व संध्या पर संप्रग सरकार को रविवार को उस समय झटका लगा जब जनता दल [एस] और रालोद ने उसके खिलाफ मतदान का फैसला किया। इन दोनों छोटे दलों के कदम से सरकार को छह सांसदों के समर्थन से हाथ धोना पड़ेगा और उसे अब सिर्फ निर्दलियों और एक सांसदों वाली पार्टियों का आसरा रह गया है।

दो दिन चलने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले नाटकीय घटनाक्रम से भरे दिन सरकार को राहत सिर्फ पांच सांसदों वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा द्रमुक के निलंबित सदस्य दयानिधि मारन और मुस्लिम मजलिस के सदस्य असदुद्दीन ओवैसी से मिली जिन्होंने विश्वासमत के दौरान समर्थन देने की घोषणा की।

अब तक के गणित के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को छोड़ कर 541 सदस्यों के सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन को 260 सदस्यों के समर्थन की उम्मीद है, जबकि विपक्षी खेमे के पास 268 का आंकड़ा है। हालांकि कुछ अन्य जोड़ घटाव के अनुसार सरकार के पास 265 से 267 वोट हैं, जबकि नौ वोट ऐसे हैं जिनका रुख अभी भी तय नहीं है।

पहले गणित के मुताबिक अनिर्णय की स्थिति वाले 12 सांसदों में दो नेशनल कांफ्रेंस, एक-एक तृणमूल कांग्रेस, एमएनएफ और एमपीएफ के हैं जबकि छह सदस्य निर्दलीय हैं। भाजपा का निलंबित सदस्य भी इनमें शामिल है जिसकी भूमिका सरकार के जीवन में महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा क्रास वोटिंग और सदन से सदस्यों की अनुपस्थिति सरकार को जीवन दे सकती है।

संभावित सहयोगियों से धोखा खाने के बावजूद इससे अप्रभावित कांग्रेस ने विश्वास व्यक्त किया है कि उसे प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन से आसानी से विश्वासमत हासिल हो जाएगा। मंगलवार को होने वाले मतदान से पूर्व यूएनपीए, वामदलों और बसपा तथा जदएस जैसे समूहों के नेता सरकार को बेदखल करने के एक सूत्रीय एजेंडे पर मिले और अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया।

बैठक के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती और माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा, हम 22 जुलाई को सरकार को पराजित करने के लिए काम करेंगे क्योंकि हम नहीं चाहते कि यह सत्ता में रहें। जिन लोगों से संप्रग ने उम्मीद पाल रखी थी उनमें तीन तीन सांसदों वाले जदएस और अजित सिंह के नेतृत्व वाले रालोद ने सरकार से दगा कर विपक्षी खेमे का दामन थाम लिया और विश्वासमत के विरुद्ध मतदान करने की घोषणा की। सरकार झामुमो और नेकां के अलावा इन दोनों समूहों के समर्थन पर बहुत निर्भर कर रही थी। नेकां ने अभी अपने रुख की घोषणा नहीं की है।

राजनीतिक गहमागहमी भरे दिन की शुरुआत झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की अपने चार सांसदों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास जाने से हुई जहां उन्होंने सरकार के प्रति अपनी पार्टी का समर्थन जताया। इसके साथ ही झामुमो को लेकर बरकरार रहस्य का पटाक्षेप हो गया। इसके बदले में गुरुजी ने दावा किया कि उन्हें मंत्रिमंडल में फिर से शामिल करने और उनके एक सांसद को राज्य मंत्री बनाने का आश्वासन मिला है।

राजनीतिक चौपड़ के दूसरे सिरे पर अजित सिंह हुमायूं रोड स्थित मायावती के आवास गए और उत्तार प्रदेश की राजनीति के संदर्भ में संभवत: सौदेबाजी की और सरकार के खिलाफ मतदान की घोषणा की। इसी प्रकार अपनी पार्टी के नेताओं के बैठक में देवगौड़ा ने घोषणा की कि उनके तीनों सांसद विश्वास मत के खिलाफ मतदान करेंगे। उनके पुत्र एच डी कुमारस्वामी ने यूएनपीए वाम बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक के बाद मायावती सीधे देवगौड़ा के घर पहुंचीं और यूएनपीए, वाम, बसपा की चर्चा में तय रणनीति पर उनसे बातचीत की।

अपनी अपनी संख्या बढ़ाने के लिए परस्पर विरोधी खेमों में जोड़तोड़ चलती रही। सपा के तीन बागी सांसदों मुनव्वर हसन, जयप्रकाश रावत और राजनारायण बुधौलिया ने मायावती से मुलाकात की और उनके प्रति अपना समर्थन जताने के अलावा सरकार के खिलाफ वोट डालने का वादा किया।

दूसरी तरफ सपा महासचिव अमर सिंह ने दावा किया कि बसपा के सात सांसद पार्टी की अवहेलना कर सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे। सरकार को राहत देने वाली एक खबर विरोधी खेमे से आयी कि भाजपा और जदयू के एक-एक सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। भाजपा से निलंबित गुजरात के सांसद सोमाभाई पटेल ने वडोदरा में कहा कि वह पार्टी व्हिप से बंधे नहीं है और वह अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। उनके इस बयान की व्याख्या सत्ता पक्ष ने अपने हित में की। इसी प्रकार बिहार में नालंदा से जदयू सांसद राम स्वरूप ने कथित तौर पर कहा कि वह सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे। संप्रग को नेकां के दो और मिजो नेशनल फ्रंट तथा नगा पीपुल्स फ्रंट के एक एक सदस्य का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। छह निर्दलीय सदस्यों पर भी सरकार की निगाह है।

विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम मतदान अब भी क्रास वोटिंग और अनुपस्थिति पर निर्भर कर सकता है जिसकी वजह प्रतिद्वंद्वी खेमों की ओर से की जा रही जोड़तोड़ होगी। आठ सांसदों वाले शिरोमणि अकाली दल ने अपनी पार्टी में किसी विभाजन का खंडन करते हुए कहा है कि उसके सदस्यों द्वारा क्रास वोटिंग नहीं होगी।




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