नई दिल्ली। तीसरी राजनीतिक ताकत के ठोस शक्ल अख्तियार करने का संकेत देते हुए यूएनपीए, वाम दलों और बसपा के नेताओं ने रविवार को एक सूत्री कार्यक्रम तय कर 22 जुलाई के विश्वासमत में संयुक्त रूप से संप्रग सरकार को गिराने का संकल्प किया।
तेदेपा नेता येरन नायडू के आवास पर हुई भोज बैठक में इन दलों ने परमाणु करार के विरोध के साथ ही 22 जुलाई के विश्वास मत को लेकर अपनाई जाने वाली रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अत्यधिक महत्वपूर्ण शख्सियत बनकर उभरीं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि बैठक में 22 जुलाई को सरकार गिराने का संकल्प किया गया।
उन्होंने कहा कि हमने अपने सभी नेताओं को सरकार गिराने से संबंधित एक सूत्री कार्यक्रम में जुट जाने को कहा है। तेदेपा नेता चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि हमने 22 जुलाई को सरकार गिराने का एक सूत्री कार्यक्रम तय किया है। उन्होंने कहा कि इस काम में हमने एचडी देवगौड़ा से भी मदद मांगी है।
मायावती ने उन पर सपा द्वारा लगाए गए सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव एंड कंपनी जरा यह तो बताए कि उनके कितने सांसदों को कहां और कितने में खरीदा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उल्टा मुलायम और उनके साथी किसी भी तरकीब से सरकार को बचाने की कोशिश में लगे हैं।
सरकार के खिलाफ मत देने वाले सांसदों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह 22 जुलाई को पता चल जाएगा। माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि बैठक में सरकार को हराने के लिए एक सूत्री कार्यक्रम तय किया गया है। हम परमाणु करार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे और 22 जुलाई को जो भी परिणाम सामने आएगा उसके बाद आगे की कार्रवाई पर विचार करने के लिए 23 जुलाई की सुबह एक बैठक की जाएगी।
भाकपा महासचिव ए बी बर्धन ने कहा कि सरकार को गिराने की नौबत इसलिए आई क्योंकि वह महंगाई और खाद्य संकट को नजरअंदाज कर परमाणु करार करने में लगी है। सरकार दमन की नीति अपना रही है। कभी वह सीबीआई जांच बंद कराती है तो कभी उसी जांच को फिर शुरू करवा देती है।
सरकार के खिलाफ विश्वास प्रस्ताव से दो दिन पहले हुई इस बैठक में माकपा के सीताराम येचुरी भाकपा के ए बी बर्धन, आरएसपी के अबनी राय और टीजे चंद्रचूड़न, फारवर्ड ब्लाक के देबब्रत बिस्वास, अगप के बृंदावन गोस्वामी, इनेलोद के अजय चौटाला और झारखंड के नेता बाबू लाल मरांडी भी मौजूद थे। जनता दल [एस] के नेता एच डी कुमारस्वामी ने भी इस बैठक में भाग लिया।
मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विचार-विमर्श के लिए बुलाई गई इस बैठक में विश्वास मत गिरने की स्थिति में उसके बाद के हालात और तीसरे मोर्चे के संभावित गठन पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि यूएनपीए और संबद्ध दल एक तीसरी राजनीतिक ताकत का ताना बाना बुनते दिखाई दे रहे हैं जो सरकार गिरने की सूरत में वैकल्पिक सरकार बना सके।
तीसरे मोर्चे के गठन को उस समय और बल मिल गया जब रालोद ने भी यूपीए का तख्ता पलटने की मुहिम में अपना नाम दर्ज करवा दिया। मायावती को इस तीसरे मोर्चे की सबसे बड़ी नेता माना जा रहा है और उन्हें प्रधानमंत्री पद के मोर्चे के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया जा रहा है। यूएनपीए के कई नेताओं का कहना है कि ऐसा होना मुमकिन है।