नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। मनमोहन सरकार को बचाने के लिए व्हिप का उल्लंघन करने वाले पांच और सांसदों उनकी पार्टियों ने निष्कासित कर दिया है। इनमें वे सांसद शामिल हैं जिन्होंने या तो सरकार के पक्ष में वोट दिया या वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे। अभी तक विभिन्न पार्टियों से बाहर का रास्ता दिखाए जाने वाले सांसदों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इनमें सर्वाधिक आठ भाजपा के हैं।
गुरुवार को जो सांसद निष्कासित किए गए उनमें जदयू और एमडीएमके के दो-दो सांसद हैं। अकाली दल ने भी अपने एक सांसद को निकाला है। जनता दल [यू] ने बिहार के नालंदा से सांसद रामस्वरूप प्रसाद और लक्षद्वीप से सांसद पीपी कोया को बाहर का रास्ता दिखाया। जदयू अध्यक्ष शरद यादव की अध्यक्षता में हुई पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद एक बयान में कहा गया कि इन दोनों सांसदों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है।
चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष ने बुधवार को देर रात रोपड़ के सांसद सुखदेव सिंह लिबड़ा को निष्कासित करने की घोषणा की।
एमडीएमके नेता वाइको ने चेन्नई में एक बयान में कहा कि एल गणेशन और जीएन रामचंद्रन को व्हिप का उल्लंघन करने और सरकार के समर्थन में मतदान करने के कारण उनकी पार्टी से प्राथमिक सदस्यता खत्म कर दी गई है। दोनों असंतुष्ट सांसदों ने 2006 विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के साथ गठजोड़ करने के कारण पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। पार्टी पदों से हटाए जाने के बाद वे स्वतंत्र ढंग से कामकाज कर रहे थे। विद्रोही सांसदों ने हाल में चुनाव आयोग से संपर्क कर उनके गुट को असली पार्टी घोषित करने की मांग की थी। लेकिन आयोग ने हाल में व्यवस्था दी थी कि वाइको के नेतृत्व वाली पार्टी ही असली एमडीएमके है।