नई दिल्ली। परमाणु करार से उपमहाद्वीप में परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ने की पाकिस्तान की चेतावनी को खारिज करते हुए भारत ने कहा कि परमाणु शस्त्रीकरण के लिए कोई जगह नहीं है।
गुरुवार को विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि यह करार पूर्णत: असैनिक मुद्दा है और इसका कोई सैन्य परिणाम नहीं है। मुखर्जी ने एक टीवी चैनल को बताया कि यह करार विश्व समुदाय के साथ असैनिक परमाणु सहयोग समझौता है। इसमें हथियारों की होड़ के लिए स्थान कहां है?
मुखर्जी ने यह टिप्पणी पाकिस्तान के जवाब में की। पाक ने चेताया था कि आईएईए के साथ भारत विशिष्ट सुरक्षा मानक समझौते से परमाणु अप्रसार के प्रयासों पर प्रभाव पड़ेगा और यह उपमहाद्वीप में हथियारों की होड़ की आशंका बढ़ाता है। यह चेतावनी आईएईए के सदस्यों और 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह को 18 जुलाई को भेजे खत में आई है।
करार के बारे में आशंका भरे इस पत्र से भारत और अमेरिका में कुछ चिंताएं उभरने के एक हफ्ते बाद पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा कि वह करार की राह में बाधा नहीं डालना चाहता लेकिन उसके साथ भी बिना किसी भेदभाव के ऐसे समझौते के बारे में विचार करना चाहिए।
पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से लंदन के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्ट्रैटिजिक स्टडीज (आईआईएसएस) में जब भारत अमेरिका परमाणु करार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, हम बाधक नहीं बनना चाहते। कुरैशी आईआईएसएस में एक व्याख्यान दे रहे थे। लंदन में कुरैशी ने कहा, हमारे साथ भी ऐसा करार करने के बारे में विचार होना चाहिए।
अमेरिकी राजदूत डेविड सी मल्फोर्ड ने भारत विशिष्ट सुरक्षा समझौते पर आईएईए में पाक का रुख चिंताजनक देखकर कहा, वाशिंगटन बातचीत कर रहा है और उम्मीद है कि इस्लामाबाद सही अर्थ में चीजों को देखेगा और सहयोगात्मक रुख अपनाएगा।
मुखर्जी ने कहा कि परमाणु प्रसार में लिप्त न रहने की भारत की प्रतिबद्धता जगजाहिर है। परमाणु करार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ असैनिक परमाणु सहयोग के लिए है। यह परमाणु शस्त्रीकरण के लिए नहीं है।
प्रणब को उम्मीद: प्रणब ने उम्मीद जताई कि करार पर बातचीत के दौरान भारत सभी देशों का समर्थन हासिल करेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि समझौते को प्रभावी बनाने के लिए ठीक- ठीक समय सीमा तय करना कठिन होगा। मुखर्जी ने कहा कि भारत केंद्रित सुरक्षा मानक समझौते पर चर्चा के लिए आईएईए बोर्ड आफ गवर्नर की एक अगस्त को बैठक होने वाली है। लेकिन इसके नतीजे पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
वामदलों के साथ कड़वाहट भरे माहौल में संबंध टूटने के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी भविष्य में उनके साथ फिर मिलकर काम करने के खिलाफ नहीं हैं। जब मुखर्जी से पूछा गया कि क्या दोनों पक्ष भविष्य में एक साथ मिलकर काम करेंगे तो उन्होंने कहा, मैं इस बारे में अभी क्या कह सकता हूं। हमें इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए कि परिस्थितियां किस करवट बैठती हैं।
टेप गुप्त रखने पर आपत्ति नहीं: संसद में वोट के लिए धन घोटाला मामले में टेप सार्वजनिक करने की मांग के बीच मुखर्जी ने कहा कि जांच पूरी होने तक अगर उसे गुप्त रखा जाता है तो उन्हें उस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। आपराधिक कार्रवाई के तहत जब मामले की सुनवाई होगी तो टेप को खुली अदालत में चलाया जाएगा। तब लोगों को हकीकत का पता चल जाएगा। लेकिन जांच प्रक्रिया के दौरान अगर कुछ चीजों को कुछ समय के लिए गुप्त रखा जाता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी।