
नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह]। कांग्रेस की नई दोस्त समाजवादी पार्टी महज कुछ महीनों के लिए सरकार में नहीं शामिल होगी। अलबत्ता उसका इससे ज्यादा जोर कम से कम तीन राज्यों में चुनावी गठजोड़ पर है। उत्तर प्रदेश के मामले में तो बात भी शुरू हो चुकी है, जहां सपा और कांग्रेस के बीच फिलहाल 55 व 25 सीटों के बंटवारे पर गठजोड़ होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक लोकसभा में विश्वासमत साबित होने के बाद अब सरकार मंत्रिमंडल का एक और विस्तार करने की तैयारी में है। इस विस्तार में वे चेहरे शामिल किये जाने की उम्मीद है, जो बीते दिनों मुसीबत की बेला में सरकार के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खड़े थे। बताते हैं कि वामदलों के समर्थन वापसी के चलते सपा और कांग्रेस के बीच हुई नई दोस्ती के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सपा नेताओं के सामने भी सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन पार्टी महज कुछ महीनों के लिए सरकार में नहीं शामिल होना चाहती। उसे डर है कि ऐसे किसी निर्णय से जनता में यह संदेश जाएगा कि सपा ने मोल-भाव करके ही सरकार को समर्थन दिया था। सपा सूत्रों की मानें तो महज कुछ महीनों के लिए सरकार में शामिल होने से चुनाव में भी नुकसान ही होगा। इसलिए इसका फैसला अगले लोकसभा चुनाव की स्थिति देखकर ही किया जाएगा।
कांग्रेस और सपा के बीच वैसे तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के लिए गठजोड़ की उम्मीदें हैं लेकिन सबसे ज्यादा जोर उत्तर प्रदेश पर है। सूत्र बताते हैं कि इस गठजोड़ में अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल के भी शामिल होने पर सपा की ओर से 50 और कांग्रेस-रालोद की ओर से 30 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की स्थिति बन सकती थी। चूंकि अब रालोद इससे बाहर है, लिहाजा अब सपा की ओर से 55 और कांग्रेस की ओर से 25 सीटों पर प्रत्याशी उतारने को लेकर गठजोड़ हो सकता है।
सपा सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने तो 24 सीटों पर ही दावेदारी की बात कही थी। हालांकि उसमें प्रतापगढ़, सलेमपुर, फर्रुखाबाद और रामपुर जैसी सीटें शामिल थीं-जिन पर अभी सपा का कब्जा है। फिलहाल दोनों के मौजूदा सांसदों के अलावा किसी सीट पर उनके पूर्व प्रत्याशियों के दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने को वरीयता देने का फार्मूला अपनाने की बात चल रही है। इस बीच, सपा अपने उन छह सांसदों की लोकसभा से सदस्यता खत्म कराने की तैयारी में है, जिन्होंने पार्टी से अलग जाकर संप्रग सरकार के खिलाफ मतदान किया। इसके लिए पार्टी जल्द ही लोकसभाध्यक्ष को एक नोटिस देने जा रही है।