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अब पार्टी के प्रति निष्ठा पर जोर देगी भाजपा

Jul 27, 02:25 am
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नई दिल्ली [रामनारायण श्रीवास्तव]। नए बने राजनीतिक समीकरणों व सांसदों की खरीद फरोख्त से लगे झटके ने भाजपा की चुनावी तैयारियां रोक दी हैं। पार्टी ने न केवल अपनी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक टाल दी है, बल्कि उम्मीदवार चयन के मापदंडों में भी बदलाव किया है। उम्मीदवार के जीतने की क्षमता को सर्वाधिक महत्व देने वाली पार्टी ने अब पार्टी के प्रति निष्ठा को सर्वोपरि रखा है।

सूत्रों के अनुसार सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां से उम्मीदवारों के नाम भेजने से पहले उनके बारे में पूरी छानबीन कर लें। पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी भाजपा के केंद्रीय सत्ता के सफर तक उससे तमाम ऐसे नेता जुड़े जो उसके अपने काडर से बाहर के थे। विस्तार के साथ ऐसा होना स्वाभाविक भी था। पार्टी ने उम्मीदवार चयन के जो तीन प्रमुख मापदंड तय किए थे उनमें पार्टी के प्रति निष्ठा, सिद्धांत, जीतने की क्षमता प्रमुख हैं। इनमें उसने जीतने की क्षमता को लगभग 50 फीसदी महत्व दिया था लेकिन अब हालात बदले हैं। सवाल पूछने के लिए पैसा लेने से लेकर विश्वास मत पर पाला बदल लेने तक की घटनाओं से भाजपा को कई झटके लगे हैं। इसे देखते हुए पार्टी ने अपने मापदंड भी बदले हैं।

दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। हाल के घटनाक्रमों में अपने सांसदों से पार्टी के दामन पर लगे दाग के बाद भाजपा ने अब उम्मीदवार के व्यक्तित्व व जीतने की क्षमता के बजाय पार्टी के प्रति निष्ठा, सिद्धांत व छवि पर ज्यादा जोर देने का फैसला किया है। उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में लगे विभिन्न राज्यों को भी पार्टी ने इस बाबत निर्देश दे दिए हैं। राज्यों से कहा गया है कि वे उम्मीदवारों के नामों के पैनल भेजने से पहले खुद भी पूरी छानबीन करें और पार्टी के तय मापदंडों के अनुसार ही विचार-विमर्श कर नाम भेजें।

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