
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। नंदीग्राम कांड पर अपनी टिप्पणियों के चलते सहयोगी वामदलों के निशाने पर एक बार आ चुके पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य फिर वाममोर्चा के निशाने पर हैं। 'बंद और घेराव' जैसे विरोध प्रकट करने के 'सबसे प्रभावी तरीकों' पर उनके अंगुली उठाने से कामरेडों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस बार तो माकपा नेता भी उनके प्रति नाराजगी जता रहे हैं।
माकपा के कायदे-कानून का अक्षरश: पालन करने वाले केरल के मुख्यमंत्री वी.एस. अच्चुतानंदन के तो अचरज का ठिकाना ही नहीं था। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अगर बुद्धदेव ने बंद विरोधी बयान दिया है तो यह बिल्कुल गलत है। माकपा के श्रमिक संगठन सीटू ने अपनी प्रतिक्रिया इसे बुद्धदेव की व्यक्तिगत सोच बताने तक ही सीमित रखी है। लेकिन सीटू की पश्चिम बंगाल इकाई के महासचिव काली घोष ने यह जरूर कह दिया कि बंद और धरना-प्रदर्शन के जरिये ही तो मजदूर अपने शोषण के खिलाफ आवाज उठाता है। यह अधिकार उससे कैसे छीना जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा बयान देने से पहले बुद्धदेव को पार्टी स्तर पर चर्चा कर लेनी चाहिए थी।
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने तो दो टूक कह दिया कि यह बुद्धदेव की अपनी राय है और उनकी पार्टी इससे कोई सरोकार नहीं रखती है। भाकपा से ही संबद्ध कर्मचारी संगठन के महासचिव गुरुदास दासगुप्त ने कहा कि वामपंथी नेता की तरफ से इस तरह का बयान आना आपत्तिजनक है। बंद तो मजदूर का प्रजातांत्रिक अधिकार है। फारवर्ड ब्लाक के नेता अशोक घोष ने भी कोलकाता में साफ कह दिया कि मार्क्सवादी नेता का यह बयान किसी भी तरह से उचित नहीं माना जा सकता।
माकपा महासचिव प्रकाश करात फिलहाल चुप्पी तोड़ने को तैयार नहीं हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह मुख्यमंत्री से इस तरह की टिप्पणी देने के लिए जवाब तलब कर सकते हैं।
थोड़ी राहत भी है
इधर, पोलित ब्यूरो में बुद्धदेव के समर्थक तर्क दे रहे हैं कि सिंगुर में जो कुछ हो रहा है उसके मद्देनजर मुख्यमंत्री ने इस तरह का बयान दिया है। राज्य के औद्योगिकीकरण में लगे बुद्धदेव को अंदेशा हो चला था कि सिंगुर की वजह से बाकी कारपोरेट हस्तियां पश्चिम बंगाल से कतराने लगेंगी। लेकिन पोलित ब्यूरो में बुद्धदेव विरोधी सदस्य चुटकी लेते हुए पूछ रहे हैं कि क्या प्रदेश की छवि सुधारने के चक्कर में बुद्धदेव ने एक और भूल कर दी।
हंगामा क्यों है बरपा
एसोचैम के कार्यक्रम के दौरान मंगलवार को बुद्धदेव ने कोलकाता में कह दिया था कि उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए बंद जैसे तरीकों पर आपत्ति है और उनकी पार्टी ही इससे परहेज नहीं करती है।