
कोलकाता। टाटा की लखटकिया कार नैनो के सिंगुर स्थित संयंत्र को लेकर उठा बवाल शांत होने के आसार नजर आने लगे हैं। इस मुद्दे पर सरकार और आंदोलनकारी तृणमूल कांग्रेस के बीच सौहार्द्रपूर्ण समझौते की संभावना बन गई है।
सिंगुर विवाद को सुलझाने के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी की अध्यक्षता में कल से संबद्ध पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। शनिवार को दो दौर में बातचीत हुई। संयंत्र के कारण जमीन गंवा चुके किसानों का जमीन देकर पुनर्वास किए जाने के मामले में दोनों पक्ष निकट आते नजर आ रहे हैं।
गांधी ने दूसरे दौर की बातचीत के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि बातचीत के दूसरे दिन दोनों तरफ के प्रतिनिधियों के बीच सिंगुर परियोजना के आसपास ही भूमि आधारित पुनर्वास
योजना पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने बताया कि दोनों तरफ के प्रतिनिधियों की बातचीत से मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी को अवगत करा दिया गया है, उम्मीद है कि कल अथवा परसों तक कोई संतोषजनक हल निकल आएगा।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस के नेता पार्थ चटर्जी ने सिंगुर भूमि को लेकर किसी समझौते से इंकार किया, किंतु कहा कि बातचीत नकारात्मक नहीं रही है। चटर्जी ने कहा कि हम भूमि को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे, किंतु बातचीत नकारात्मक नहीं हैं, कल या परसों फिर बातचीत होगी।
चटर्जी ने कहा कि वह पहले बातचीत का ब्यौरा ममता बनर्जी को देंगे और उसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। राजभवन के सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष प्रभावित किसानों को भूमि उपलब्ध कराने के सवाल पर किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए समय चाहते थे। राज्य सरकार पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध कराने के लिए तैयार हो गई है। सूत्रों ने बताया कि विपक्ष का प्रयास है कि पुनर्वास के लिए जितनी भूमि की जरूरत है वह हासिल की जाए।
राज्यपाल पर सिंगुर मुद्दे पर कल मुख्यमंत्री से बातचीत करेंगे। आज पहले दौर की बातचीत 11 बजे शुरू हुई और दोपहर दो बजे तक चली। दूसरे दौर की बातचीत चार बजे से शाम छह बजे तक चली। कल इस मुद्दे पर तीन घंटे विचार-विमर्श हुआ था।
राज्य सरकार की तरफ से उद्योग मंत्री निरुपम सेन सात सदस्यीय सरकारी दल की अगुवाई कर रहे थे। इसमें पंचायत राज्य मंत्री सूर्यकांत मिश्रा और मुख्य सचिव अमित किरन देब भी शामिल थे। विपक्ष की तरफ से बातचीत का जिम्मा राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पार्थ चटर्जी ने संभाला हुआ था। छह अन्य सदस्यों में कृषि भूमि रक्षा समिति के सदस्य थे।