
नई दिल्ली। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भारत पर से परमाणु प्रतिबंध हटाने के परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह [एनएसजी] के फैसले को सरकार की निरस्त्रीकरण और अप्रसार की नीति तथा राष्ट्रीय सहमति के अनुरूप बताते हुए शनिवार को कहा कि इससे परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण कार्यो के लिए इस्तेमाल को लेकर अन्य देशों से भारत के सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत होगी।
मुखर्जी ने विएना में एनएसजी के फैसले के बाद जारी वक्तव्य में कहा कि 45 देशों के समूह द्वारा भारत पर से प्रतिबंध हटाया जाना एक अनूठा घटनाक्रम है जो साबित करता है कि सरकार ने देश की जनता और संसद से किए गए वायदों को पूरा किया तथा राष्ट्रीय हितों को भी अक्षुण्ण रखा है। विदेश मंत्री ने इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत भविष्य में अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिल कर काम करने की दिशा में अग्रसर रहेगा।
मुखर्जी ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दूरदर्शिता, प्रतिबद्धता और मार्गदर्शन का परिणाम बताते हुए समूची प्रक्रिया को साकार करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश, विदेश मंत्री कोंडेलिसा राइस, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक मोहम्मद अल बरदई के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारत के पक्ष में अथक प्रयासों के लिए अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस तथा एनएसजी के मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील को धन्यवाद दिया।