
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह [एनएसजी] द्वारा भारत-अमेरिका परमाणु करार की सफलता के लिए भारत को दी गई छूट को भाजपा ने देश के लिए ऐतिहासिक शर्म का दिन करार दिया है।
पार्टी का मानना है कि इससे हमने अपने परमाणु परीक्षण का अधिकार हमेशा के लिए खो दिया है और परमाणु ईंधन की निर्बाध आपूर्ति व तकनीक के हस्तांतरण की स्पष्ट गारंटी भी हासिल नहीं हुई है। परमाणु ऊर्जा को अभी भी बड़ा प्रश्न चिन्ह बताते हुए भाजपा ने पूछा है कि यह बिजली किस कीमत पर आम आदमी को मिलेगी, इस पर सरकार की चुप्पी बेहद रहस्यमयी है।
परमाणु करार पर भाजपा की कोर टीम के सदस्य व पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने एनएसजी द्वारा परमाणु व्यापार के लिए भारत को दी गई छूट पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि इससे भारत पूरी तरह एनपीटी के जाल में फंस गया है। अमेरिका से परमाणु करार को सीटीबीटी व एनपीटी से भी ज्यादा कड़ी शर्तो वाला बताते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत को आने वाले दिनों में सामरिक दृष्टि से इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस समझौते से भारत ने अपने परमाणु परीक्षणों के लिए मौत की सजा स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि इस छूट के बाद भारत अमेरिका के बजाय फ्रांस व रूस से भी परमाणु ईंधन खरीद सकता है, वे यह नहीं समझ रहे हैं कि यह बात बेमतलब है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा है कि कोई भी देश अमेरिका के आफर से बेहतर डील भारत को नहीं दे सकता है।
दरअसल भारत बहुत बड़ा बाजार है और अमेरिका इसका लाभ उठाना चाहता है।
सिन्हा ने इस छूट पर खुशियां मना रही कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि लगता है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सिद्धांतों को पूरी तरह तिलांजलि देने का जश्न मना रही है। इंदिरा गांधी ने 1974 में परमाणु परीक्षण कर देश को जो ताकत दी थी, उस पर भारत को दंडित करने के लिए ही एनएसजी का गठन किया गया था। सरकार का यह कदम इंदिरा गांधी व अटल बिहारी वाजपेयी की परंपरा को छोड़ना है।