
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। परमाणु सामग्री आपूर्तिकर्ता देशों के समूह [एनएसजी] ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को भले ही हरी झंडी दे दी हो, लेकिन बसपा अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर इसका पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार अपने निहित स्वार्थो के लिए यह समझौता कर रही है, जिसका देशहित से कतई कुछ लेना-देना नहीं है।
मायावती ने करार के संदर्भ में शनिवार को यहां कांग्रेस के साथ ही भाजपा और सपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस मामले में इन सभी दलों ने समझौते के तथ्यों को छिपाया है। देश की जनता व संसद को गुमराह किया है। इसलिए शर्तों के बारे में जनता को विश्वास में लिए बिना समझौता किया ही नहीं जाना चाहिए।
मायावती ने कहा कि समझौते की गलत शर्तों के खुलासे से सरकार इस कदर घबरा गई है कि वह संसद का सत्र बुलाने का साहस नहीं जुटा पा रही है। यहां तक कि मानसून सत्र को समय से बुलाने के बजाय उसे अक्टूबर-नवंबर में बुलाया जा रहा है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि संसद सत्र जल्दी बुलाने की मांग करते हुए उनकी पार्टी राष्ट्रपति को एक चिट्ठी लिख रही है।
राष्ट्रपति के निर्देश पर भी सरकार सत्र नहीं बुलाती तो उन्हें सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी बड़े नेता शुरू से ही परमाणु निरस्त्रीकरण संधि [एनपीटी] को गैर बराबरी की संधि मानने के साथ ही स्वतंत्र परमाणु नीति के पक्षधर रहे हैं। इसलिए कांग्रेस को साफ करना चाहिए कि स्वतंत्र परमाणु नीति को त्याग कर अमेरिका का पिछलग्गू बनने की वजह क्या है?