नई दिल्ली। परमाणु कारोबार के लिए छूट देने संबंधी एनएसजी के कदम की भारत ने शनिवार को तारीफ की। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे ऐतिहासिक और मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह भविष्योन्मुख और महत्वपूर्ण फैसला है।
चिंता के कुछ क्षणों का सामना करने के बाद अब सरकार सुख का अनुभव कर रही है। वरिष्ठ मंत्रियों, विदेश नीति के जानकारों और परमाणु प्रतिष्ठानों के शीर्ष अधिकारियों ने इस अभूतपूर्व फैसले को अनोखा घटनाक्रम करार दिया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एनएसजी की विएना में हुई बैठक में सफलता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश के सशक्त नेतृत्व की तारीफ की। दोनों नेताओं ने एनएसजी में आम सहमति के लिए एक दूसरे को बधाई दी और भारत अमेरिका असैनिक परमाणु करार को आगे बढ़ाने के संयुक्त प्रयासों की तारीफ की।
सिंह ने एक वक्तव्य में कहा कि इसने परमाणु मुख्यधारा से भारत के दशकों पुराने अलगाव और परमाणु प्रौद्योगिकी से भारत को वंचित रखने वाली व्यवस्था को खत्म कर दिया है। सिंह ने भारत को छूट दिलाने में महत्वपूर्ण निभाने के लिए अमेरिका और अन्य सदस्य देशों का शुक्रिया अदा किया। यह भारत के बेदाग अप्रसार रिकार्ड और अत्याधुनिक परमाणु प्रौद्योगिकी वाले राष्ट्र के दर्जे को मान्यता देता है। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यह फैसला अन्य देशों के साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के मामले में भारत के सहयोग की दिशा में नया अध्याय शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि एनएसजी छूट एक अनोखा घटनाक्रम है जिसे संसद और भारत की जनता के साथ किए गए वादे के अनुरुप हासिल किया गया है और यह भारत के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है।
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोडकर ने कहा कि आज का दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि हमने बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने इस छूट को अनोखा करार दिया क्योंकि यह 34 साल के एकाकीपन के बाद अंतरराष्ट्रीय असैनिक परमाणु कारोबार में भारत के हिस्सा लेने का मार्ग खोल देगा।
काकोडकर ने कहा कि परमाणु परीक्षण करने के भारत के कानूनी अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और एनएसजी से छूट हासिल करने को लेकर देश ने इस संबंध में कोई वचन नहीं दिया है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि एनएसजी की छूट में परमाणु परीक्षण का सुस्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने साफ किया कि 45 सदस्यीय एनएसजी द्वारा भारत को दी गई छूट में परमाणु ऊर्जा विभाग की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया गया है।
काकोडकर ने कहा कि हमने परीक्षण को लेकर कोई कानूनी वचन नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही परमाणु परीक्षण करने पर स्वैच्छिक रूप से एकतरफा पाबंदी लगा रखी है। विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा कि एनएसजी से छूट दिलाने के मामले में अमेरिका ने नेतृत्वकारी भूमिका ली। उन्होंने अमेरिकी मसौदे का समर्थन करने के लिए सभी देशों का शुक्रिया अदा किया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने कहा कि एनएसजी बैठक में चीन के नजरिए को लेकर सरकार थोड़ा आश्चर्यचकित थी। चीनी नेतृत्व ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया था कि वे कभी समस्या का हिस्सा नहीं बनेंगे और हमारे लिए कभी कठिनाई पैदा नहीं करेंगे।