नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। नाभिकीय ऊर्जा आने में तो अभी वक्त लगेगा, लेकिन यूपीए के चुनाव अभियान को एनएसजी में सफलता से तगड़ी ऊर्जा मिलना तय है। यही वजह थी कि वियना से खबर आने के बाद संप्रग सरकार और कांग्रेस में खुशियां उमड़ पड़ीं। इन खुशियों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से लेकर पूरा यूपीए खेमा शरीक था।
कांग्रेस ने बिना देरी किए अपने चुनावी इरादे भी जाहिर कर दिए। पार्टी ने साफ कहा कि लोकसभा चुनाव में संप्रग सरकार की उपलब्धियों के 'शो-केस' में परमाणु करार एक अहम मुद्दा होगा। प्रधानमंत्री ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए इसे न केवल देश की उर्जा सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा फैसला बताया, बल्कि यह भी कहा कि इससे दुनिया के परमाणु क्लब की मुख्य धारा में दशकों से भारत को अलग-थलग रखने की व्यवस्था का अंत हो गया है।
सत्ता के शीर्ष से इस कामयाबी को भुनाने का राजनीतिक संदेश प्राप्त होते ही सरकार के अलग-अलग तंत्रों से लेकर पूरी कांग्रेस पार्टी तत्काल सक्रिय हो गई। प्रणब मुखर्जी, अनिल काकोदकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन से लेकर विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल तक सरकार की ओर से इस कामयाबी की न केवल व्याख्या कर रहे थे, बल्कि यूपीए को इसका राजनीतिक लाभ लेने का आधार भी तैयार कर रहे थे।
कांग्रेस ने भी बिना देरी किए अपने वाक्पटु नेताओं को इसका परचम लहराने और विपक्ष के विरोधी प्रचार की हवा निकालने के लिए मैदान में उतार दिया। पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह, मीडिया विभाग के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली, मनीष तिवारी व अभिषेक सिंघवी कांग्रेस दफ्तर से लेकर चैनलों तक मीडिया में इसे एतिहासिक साबित करते रहे। मोइली ने तो यहां तक कह डाला कि करार भारत के लिए 21वीं सदी की अब तक की सबसे बड़ी घटना है। दिग्विजय सिंह ने बेहिचक कहा कि कांग्रेस इसे चुनाव में एक अहम मुद्दे के रूप में न केवल ले जाएगी, बल्कि यह बताएगी कि गांव-गांव में बिजली लाने की उनकी कोशिशों में विपक्ष रोड़ा अटका रहा था।
करार को अंजाम तक पहुंचाने की इस खुशी के बावजूद कहीं न कहीं कांग्रेस को इस बात की आशंका है कि चुनावी अखाड़े में परमाणु बम बनाने का अधिकार गंवाने की गलत व्याख्या कर विपक्ष जनता को गुमराह कर सकता है। इसलिए पार्टी ने विपक्ष के इस प्रचार का आज से ही जवाब देना शुरू कर दिया। विपक्ष के इस गंभीर आरोप का जवाब देने के लिए पार्टी यह संदेश पहुंचाएगी कि भारत के पास जरूरत के हिसाब से ढेरों परमाणु बम हैं और अब बम की नहीं, बल्कि गांव-गांव में बिजली की जरूरत है।