नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने शनिवार को कहा कि वह एनएसजी की बैठक में अपनाए गए रुख से हुई निराशा को भारत चीन के समक्ष उठाएगा। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के साथ भी उस पत्र का मुद्दा उठाएगा जो उसके विदेश मंत्रालय ने कांग्रेस को लिखा था।
नारायणन ने कहा कि चीन के विदेश मंत्री यांग जिएंची अगले सप्ताह भारत के दौरे पर आ रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर उनके साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें चीन से काफी उम्मीदें थीं। हम आश्वस्त हैं कि इस मुद्दे पर वह अपना स्पष्टीकरण देंगे। नारायणन ने कहा कि हम एनएसजी में चीन के रुख से आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति हु जिनताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आश्वस्त किया था कि वे भारत के लिए कभी समस्या नहीं बनेंगे न कोई कठिनाई पैदा करेंगे।
उन्होंने कहा कि हमें चीन से कोई समस्या नहीं है। हम अपने पड़ोसी नहीं चुन सकते हैं।
चीन और पाकिस्तान हमारे पड़ोसी हैं और हम दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत के साथ कई समस्याएं पैदा कीं पर हाल के कुछ वर्षो में उसके साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में काफी सुधार आया है।
उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के साथ उस पत्र का मुद्दा उठाएगा जो उसके विदेश मंत्रालय ने कांग्रेस को लिखा था। पत्र में उल्लेख है कि अगर भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो उसे ईधन आपूर्ति रोक दी जाएगी। एक निजी चैनल के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत ने साफ किया है कि उसका दृष्टिकोण क्या है। अमेरिका के साथ हमारा 123 समझौता है जिस पर दस्तखत होने हैं। अब एनएसजी में छूट मिलने से हम हस्ताक्षर प्रक्रिया पूरी करेंगे।