सुलझ ही गया सिंगूर विवाद

 
Sep 07, 07:32 pm

कोलकाता। सिंगूर विवाद को सुलझाने के लिए राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी की अध्यक्षता में रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी आमने-सामने बैठे। अंतत: देर रात दोनों पक्षों में गहन चर्चा के बाद कई दिनों से चले आ रहे इस मसले पर सहमति बन ही गई। अब यह तकरीबन पुख्ता हो गया है कि टाटा की लखटकिया कार नैनो सिंगुर से ही आएगी।

राज्यपाल गांधी ने कहा कि सिंगूर मामले पर आम सहमति बन गई है। सरकार ऐसे किसानों को जमीन लौटाएगी जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा नहीं मिला था। जमीन में से अधिकांश टाटा मोटर्स छोटी कार परियोजना वाले इलाके में वापस की जाएगी।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि जमीन वापसी के तौर तरीकों के लिए एक समिति गठित की जाएगी जो एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सरकार ने कहा है कि समिति के कामकाज के दौरान परियोजना इलाके में निर्माण कार्य नहीं होगा।

इधर, तृणमूल कांग्रेस ने सिंगूर में अपने धरना कार्यक्रम को निलंबित करने की घोषण की है। राजभवन में हुई इस बैठक के नतीजे के बारे में बताया गया है कि सहमति कायम हो गई है। ममता सिंगुर मुद्दे पर अपना आंदोलन वापस ले लेंगी।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में यह तय हुआ है कि सिंगुर के जमीन मसले का समाधान खोजने के लिए एक कमेठी गठित की जाएगी। इसके साथ यह भी बताया गया है कि नैनो कार प्रोजेक्ट के निकट 15 दिनों से बेमियादी धरने पर बैठीं ममता शीघ्र ही वहां से हट जाएंगी।

पश्चिम बंगाल के लोक निर्माण मंत्री और आरएसपी नेता क्षीति गोस्वामी ने माकपा मुख्यालय पर पत्रकारों को बताया कि दोनों पक्षों में एक सहमति बनी है कि किसानों को जमीन वापस करने के मुद्दे पर चार सदस्यीय समिति बनाई जाएगी। लेकिन ममता ने कुछ अन्य पहलुओं पर आपत्तिभी जताई थी।

जानकारी के मुताबिक राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में ममता से बातचीत के बाद मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य वाम दलों के नेताओं से मशविरा करने माकपा मुख्यालय चले गए थे। सिंगुर मसले पर ममता और भट्टाचार्य की यह पहली सीधी मुलाकात थी। लोक निर्माण मंत्री गोस्वामी ने कहा है कि बुद्धदेव एक बार फिर ममता से बात करने राजभवन गए।

इससे पहले गोस्वामी ने बताया कि नैनो प्रोजेक्ट के निकट 56 सहायक इकाइयां लगनी हैं। इनमें 33 को जमीन दे दी गई है और काम भी शुरू हो गया है। कुल मिलाकर इस बात पर सहमति बन गई थी कि जिन 23 सहायक वेंडर्स इकाइयों को जमीन आवंटित नहीं की गई है, उसे किसानों को वापस कर दिया जाएगा। अस्थाई तौर पर यथास्थिति को बनाए रखा जाएगा। इसके बाद ममता ने उन 33 सहायक वेंडर्स इकाइयों का मुद्दा उठा दिया जिन्हें जमीन आवंटित कर दी गई है और काम शुरू कर दिया है। हालांकि एसयूसीआई नेता माणिक बनर्जी ने कहा है कि बातचीत टूटी नहीं है। उन्होंने भी कहा है कि सरकार ने उन वेंडर्स इकाइयों की जमीन किसानों को वापस करने सहमति जाहिर कर दी है, जो अभी जमीन पर काबिज नहीं हुई हैं। लेकिन मसौदे को लिखित रूप देने के दौरान सरकार शब्दों में कुछ तब्दीली चाहती थी।




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