
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के हस्ताक्षर के साथ ही कानून में तब्दील होने के कगार पर पहुंच चुके परमाणु करार की कुछ कठिन शर्तो पर भारत को वाशिंगटन से सफाई आने की उम्मीद है। विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडालीजा राइस के जरिए एटमी संधि में मौजूद कुछ 'विवादास्पद' प्रावधानों पर सरकार की आपत्ति होने का संदेश व्हाइट हाउस भेजा भी है। यह वही प्रावधान हैं जिनको लेकर विपक्ष यहां सरकार पर लगातार अंगुली उठा रहा है।
बुश के दस्तखत के बाद विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडालीजा राइस के बीच वाशिंगटन में करार पर अंतिम हस्ताक्षर की औपचारिकता 13 अक्टूबर को पूरी की जाएगी। इधर, राइस के मार्फत घरेलू राजनीति में उठ रहे विवाद का संदेश अमेरिका भेज कर सरकार इस भरोसे में है कि बुधवार को जब व्हाइट हाउस में बुश हस्ताक्षर करेंगे तो उसमें कुछ ऐसा होगा कि भारत में मचा बवाल ठंडा पड़ जाए। ऐसी उम्मीद बांधने की सरकार के पास बड़ी ठोस वजह भी है। सरकार के मुताबिक वित्तीय संकट से जुड़े विधेयक पर हस्ताक्षर से काफी पहले निपट चुके बुश अगर करार पर दस्तखत में विलंब कर रहे हैं तो इसका मतलब यही है कि वह समझौते के विवादास्पद अंशों पर सफाई पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
सरकार के सूत्रों को पता चला है कि व्हाइट हाउस के प्रबंधक बुश के दस्तखत के साथ जारी किए जाने वाले बयान की भाषा पर काफी मशक्कत कर रहे हैं। यह देखा जा रहा है कि निर्बाध ईधन आपूर्ति को भरोसा नहीं होने पर सफाई कैसे पेश की जा सकती है। दोबारा प्रसंस्करण और भंडारण प्रौद्योगिकी [ईएनआर] बिना एनपीटी वाले देश को देने से इनकार करने का बुश कोई नरम तरीका तलाश रहे हैं। बुश कह सकते हैं कि अमेरिकी कांग्रेस में कानूनी संशोधन के जरिए यह अनिवार्यता समाप्त करने पर विचार होगा।
व्हाइट हाउस में चल रही इस कवायद से सरकार की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। हालांकि शनिवार को हैदराबाद हाउस में मुलाकात के दौरान राइस ने तो प्रणब को निराश ही किया था। उन्होंने कह दिया था कि 123 समझौता तो हो चुका है और कोई भी मुद्दा अब बाकी नहीं रह गया। उन्होंने संकेत दिए थे कि अब सफाई जैसी कोई उम्मीद तो भारत को नहीं बांधनी चाहिए। राइस के इस तेवर की वजह से सरकार इसके लिए दबाव नहीं बना पाई लेकिन उन्हें बताया गया था कि व्हाइट हाउस से सफाई के तौर पर आया एक भी संदेश भारत में गरमा रही राजनीति को ठंडा जरूर करेगा।