नई दिल्ली। केरल पुलिस के लिए काम करने वाले दो मुस्लिम चालकों को भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की मंगलवार को कोझिकोड यात्रा के दौरान उनके कार काफिले से हटा लिया गया था। केंद्र सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। भाजपा ने आडवाणी के काफिले से मुस्लिम चालकों को हटाए जाने के कदम को गलत बताया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का एक विशेष दल मंगलवार को कोझिकोड पहुंचा। उसने जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त आडवाणी के लिए केरल पुलिस द्वारा तैनात पुलिसकर्मियों की सूची की जांच की। एनएसजी दल ने उनके कार काफिले में दो मुस्लिम चालकों का नाम पाया। सूत्रों ने बताया कि विशेष कमांडो दल ने तुरंत दोनों को हटाने की मांग की। दोनों चालकों को कहा गया कि उन्हें ड्यूटी से हटा लिया गया है। उन्हें इसका कारण भी नहीं बताया गया।
इस मामले को विदेश राज्य मंत्री ई अहमद ने केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता के समक्ष उठाया। अहमद ने इस कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जताई। गुप्ता ने अहमद को सूचित किया कि एनएसजी के महानिदेशक जे के दत्त से कहा गया है कि तुरंत मामले की जांच करें और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें।
भाजपा ने इसे संप्रग की वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताते हुए मुस्लिम चालकों को अपने नेता आडवाणी के काफिले से हटाने को गलत बताया। बुधवार को पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह गलत है। हमारे किसी नेता को इस बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने जाति, धर्म या वंश के आधार पर कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा एजेंसियों के जरिये चुनाव से पहले पार्टी की छवि खराब करके चुनावी लाभ उठाने का स्पष्ट मामला है। उन्होंने इसे संप्रग की वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा करार दिया।
उधर, तिरुअनंतपुरम से प्राप्त खबरों के मुताबिक केरल सरकार ने भी इस मामले में बुधवार को पुलिस महानिदेशक से जांच कराने का आदेश दे दिया। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के विरोध के बाद गृह मंत्री कोदिवेरी बालाकृष्णन ने जांच का आदेश दिया। लीग ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। दूसरी ओर कोझीकोड शहर पुलिस आयुक्त ने इस बात का खंडन किया कि धार्मिक आधार पर ऐसी कोई कार्रवाई की गई।