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उत्तराखंड संकट पर सक्रिय हुआ भाजपा नेतृत्व

Oct 21, 09:12 pm
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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। उत्तराखंड में भाजपा के असंतुष्ट विधायकों के इस्तीफों को लेकर बनी असहज स्थिति से निपटने के लिए भाजपा आलाकमान ने कुछ कड़ाई बरतने के संकेत दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत को तलब कर उन्हें हालात सामान्य करने के निर्देश दिए। संकेत है कि प्रदेश नेतृत्व बागी विधायक हरभजन सिंह चीमा के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है। इसी बीच असंतुष्ट धड़े ने नेताओं के भी जल्द दिल्ली आने की संभावना है।

भाजपा नेतृत्व अब भी मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूड़ी के खिलाफ बगावत को गंभीर समस्या मानने के बजाए उनके फौजी स्वभाव के कारण पैदा हुई समस्या भर मान रहा है। प्रदेश के संकट को सुलझाने की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय नेता वेंकैया नायडू और सुषमा स्वराज ने इस मामले पर दोनों पक्षों के नेताओं से बात की है। इसी बीच पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष बची ंिसंह रावत को बुलाकर उनसे राज्य के हालात की पूरी जानकारी ली है। इस मुलाकात के बाद संकेत मिले हैं कि प्रदेश नेतृत्व मीडिया में जाकर मुंह खोलने के लिए बागी विधायक हरभजन चीमा पर कार्रवाई कर सकता है। उन्हें जल्द ही कारण बताओ नोटिस थमाए जाने के संभावना है।

प्रदेश के कुछ विधायक अभी दिल्ली में है और वे केंद्रीय नेताओं से मिलने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें कुछ की मुलाकात सुषमा स्वराज से होनी है। संकट ज्यादा न बढ़े इसलिए असंतुष्ट धड़े के नेता भगत सिंह कोश्यारी को जल्द ही दिल्ली बुलाए जाने के संकेत भी हैं। मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी के 24 अक्टूबर को दिल्ली आने का कार्यक्रम है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम में जरूरी हुआ तो वे पहले भी आ सकते हैं।

विधायकों के दायित्व पर अभी फैसला नहीं

देहरादून। मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी का कहना है कि विधायकों के दायित्व पर अभी फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। इस मामले में हाईकमान की हरी झंडी का इंतजार है। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहीं।

सत्रह विधायकों के इस्तीफे की चर्चा पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। इस बारे में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भी बात हुई है। उन्होंने भी इस्तीफे की बात से इनकार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों से उनकी बात हो रही है। किसी ने भी इस्तीफे की बात नहीं की। एक सवाल पर उनका कहना था कि पार्टी में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है पर हर बात की कोई सीमा होती है। सीमा के बाहर जाकर बात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई निश्चित होगी। पार्टी में बढ़ रही अनुशासनहीनता के सवाल पर जनरल ने कहा कि 'यह कलियुग का असर' है।

इस्तीफे की न पुष्टि

की, न ही इनकार

देहरादून। राज्य के कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कूटनीतिक लहजा मंगलवार को कई सवाल खड़े कर गया। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने हाईकमान को इस्तीफा दिया है, तो उनका जवाब था, 'नो कमेंट'। जब पूछा गया कि इस्तीफा नहीं दिया, तब भी पुराने ही शब्द बोल गए। किसी भी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। इस्तीफा देने के मामले में न तो उन्होंने पुष्टि की और न ही इनकार किया।

उनका यह कूटनीतिक बयान यह साबित कर रहा है कि कहीं कुछ पक रहा है। रावत की गिनती मुख्यमंत्री के प्रति बगावती तेवर अपनाने वाले विधायकों की अगुवा के रूप में की जाती है। 17 विधायकों द्वारा इस्तीफा दिए जाने की चर्चा में रावत का नाम भी है।

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