भारत-पाक वार्ता में शामिल हो कश्मीरी

 
Nov 21, 02:13 pm

नई दिल्ली। पाकिस्तानी सांसदों के एक समूह का कहना है कि भारत और पाकिस्तान को अपनी वार्ता प्रक्रिया में कश्मीरियों को तीसरे पक्ष के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए, ताकि कश्मीर मुद्दे का एक स्थायी और सर्व स्वीकार्य समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

सांसदों ने कहा कि कश्मीर मुद्दे और अन्य प्रमुख मुद्दों के हल के लिए बातचीत और भारत-पाक संबंधों के मद्देनजर व्यापार तथा अन्य पहलुओं को बढ़ाने के प्रयासों में गति लाई जानी चाहिए। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच संपर्क बढ़ाने के प्रयास के तहत यहां आया है। इस प्रतिनिधिमंडल को लगता है कि दोनों देशों में संबंधों में सुधार के लिए जो गर्मजोशी और उत्साह है, वह पूरे क्षेत्र के लिए बेहतर होगा।

प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख फरजाना रजा ने कहा कि अगर दक्षिण एशिया के दोनों देश भारत और पाकिस्तान अपने मतभेद दूर कर लेते हैं तो क्षेत्र में शांति होगी। फरजाना बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम की अध्यक्ष हैं और उन्हें संघीय मंत्री का दर्जा प्राप्त है।

कश्मीर मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ कश्मीरी भी खास महत्व रखते हैं और दोनों देशों की वार्ता प्रक्रिया में कश्मीरियों को तीसरे पक्ष के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए। पीपीपी नेता फरजाना ने कहा कि कश्मीर के लोगों को इस मुद्दे के हल के लिए तीसरे पक्ष के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए ताकि हमें एक स्थायी और सर्व स्वीकार्य समाधान मिल सके। उन्होंने कश्मीर मुद्दे का समाधान निकालते समय संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और समकालीन स्थिति को ध्यान में रखने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को कश्मीर तथा अन्य मुद्दों का हल बातचीत के माध्यम से निकालना चाहिए ताकि दोनों देशों की जनता को फायदा हो सके और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी वैश्विक चुनौतियों से मिलजुलकर निपटा जा सके।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी राजनीतिक परिदृश्य और जनता दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों के पक्षधर हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार में वृद्धि खास कर नियंत्रण रेखा के दोनों ओर होने वाले व्यापार को लेकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि ऐसे उपायों को और बढ़ावा देने की जरूरत है।

पीपीपी नेता ने कहा कि जब तक हम इन सभी मुद्दों को नहीं सुलझाते, हम वैश्विक स्तर के बड़े मुद्दों का हल नहीं निकाल सकते। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास दक्षेस स्तर पर भी किए जाने चाहिए। आतंकवाद के मुद्दे पर फरजाना ने कहा कि दोनों देशों को इसके हल के लिए मिलजुल कर काम करना चाहिए और मानवता के खिलाफ काम करने वाले तथा दोनों देशों के बीच गलतफहमी पैदा करने का प्रयास करने वाले तत्वों को परास्त किया जा सके।

सीमा के दोनों ओर चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में पिछले साल हुए विस्फोट का कारण हिंदू आतंकवाद को बताए जाने संबंधी खबरों के बारे में पूछने पर फरजाना ने कहा कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता। कोई भी ईसाई, हिंदू, या मुस्लिम आतंकवाद नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आतंकी मानवता के खिलाफ काम करता है और मानवता का दुश्मन होता है। आतंकियों का अपना एजेंडा होता है। उनका उद्देश्य देश को अस्थिर करना होता है। आतंकी दोनों देशों के बीच गलतफहमियां पैदा कर रहे हैं।

फरजाना ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को आतंकवाद से निपटने के लिए एकजुट हो कर काम करना चाहिए। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों में किए जा रहे सामाजिक विकास के बारे में विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान करना भी है। फरजाना ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से मुलाकात की।

पीपीपी नेता ने कहा कि पाकिस्तान भारत द्वारा चलाई जा रही सामाजिक एवं ग्रामीण विकास की योजनाओं की सराहना करता है। उन्होंने असंगठित कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की खास तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसा ही कार्यक्रम उनके देश में भी चलाया जाएगा।




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