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प्रज्ञा के आरोपों की जांच कराएगी सरकार

Nov 21, 09:19 pm
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नई दिल्ली। मालेगांव विस्फोट की मुंबई एटीएस जांच के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा किए जा रहे सियासी इस्तेमाल के बीच भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शुक्रवार को दावा किया कि सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के यातना के आरोपों की जांच कराएगी।

आडवाणी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन से भेंट के बाद हिन्दुस्तान टाइम्स एक समाचार पत्र के लीडरशिप शिखर सम्मेलन में कहा कि बैठक का इस आश्वासन के साथ समापन हुआ कि हलफनामे [ठाकुर द्वारा अदालत में पेश] के आरोपों की जांच कराई जाएगी।

हालांकि उन्होंने कांग्रेस नेता राशिद अल्वी के इस सवाल को टाल दिया कि क्या जो लोग बटला हाऊस जामिया नगर की मुठभेड़ पर असंतोष जाहिर कर रहे हैं उन्हें भी संतुष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बृहस्पतिवार को जब उनसे इस सिलसिले में बात की तो उन्होंने उनसे आग्रह किया था कि वह ठाकुर के हलफनामे को पढ़ें। आडवाणी ने कहा कि हिंदू आतंकवाद जैसे शब्द के प्रयोग पर आपत्तिके अलावा वह पिछले एक महीने से इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे थे। उन्होंने कहा कि यह परवाह किए बिना कि एक आतंकी किस समुदाय से संबंध रखता है उसकी जांच करके उसे दंडित किया जाना चाहिए।

उधर, भाजपा सूत्रों ने दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन ने आज उसके नेता आडवाणी को आश्वासन दिया कि मालेगांव विस्फोट की अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मुंबई एटीएस पर यातना के जो आरोप लगाए हैं उनकी जांच कराई जाएगी। नारायणन ने आज शाम आडवाणी से मुलाकात करके उन्हें मालेगांव विस्फोट जांच के बारे में बताया। उन्होंने उन आशंकाओं पर भी चर्चा की जिसे आडवाणी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बृहस्पतिवार को हुई बात के दौरान उठाया था।

उधर, भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी के अनुसार आडवाणी ने नारायणन से कहा कि एटीएस के विरूद्ध उनके आरोप ठाकुर द्वारा अदालत में दाखिल हलफनामे में लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका जांच से कुछ लेना देना नहीं है।

नारायणन ने कथित रूप से आडवाणी को आश्वासन दिया कि ठाकुर के आरोपों की जांच कराई जाएगी। भाजपा नेता और नारायणन के बीच हुई 40 मिनट की इस मुलाकात के दौरान खुफिया ब्यूरो के प्रमुख पीसी हल्दर और आईबी के पूर्व निदेशक अजीत दोवाल भी उपस्थित थे।

आडवाणी ने बृहस्पतिवार को यह सवाल भी उठाया था कि ठाकुर पर इतने सारे नार्को टेस्ट करने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इन टेस्टों के दौरान कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

भाजपा नेता के इस आरोप पर प्रधानमंत्री ने उनसे बात की और निर्णय किया कि इस पूरे मामले की जानकारी देने के लिए वह नारायणन को उनके पास भेजेंगे।

एटीएस जांच दिशाहीन और राजनीति से प्रेरित

नई दिल्ली। भाजपा ने शुक्रवार को कहा कि एक ओर मालेगांव विस्फोट के अभियुक्तों को हिन्दू आतंकी बताना और दूसरी ओर यह कहना कि उनकी योजना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं को निशाना बनाने की थी से साबित होता है कि मुंबई एटीएस की जांच दिशाहीन होने के साथ राजनीतिक से प्रेरित है।

पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि एटीएस के सूत्रों के हवाले से खबरों में कहा गया है कि मालेगांव विस्फोट के अभियुक्तों का अगला निशाना आरएसएस के नेता थे। इससे पहले कांग्रेस ने इसे भगवा षडयंत्र बताते हुए इसे हिन्दू आतंकवाद का नाम दिया था। इससे सिर्फ यही साबित होता है कि एटीएस की जांच अब दिशाहीन है और राजनीतिक दबाव में चल रही है। उन्होंने कहा कि खबरों के अनुसार एटीएस सूत्रों ने बताया कि मालेगांव विस्फोट के अभियुक्त श्याम आप्टे और दयानंद पांडे हिन्दुत्व के लिए खास कुछ नहीं करने के आरोप में आरएसएस नेता मोहन भागवत तथा इंद्रेश का सफाया करना चाहते थे। रुडी ने मालेगांव विस्फोट अभियुक्तों के खिलाफ मकोका लगाने की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा केवल इसलिए किया गया है जिससे कि उन्हें छह महीने तक जेल में रखा जा सके। इन आरोपों के साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने यह सफाई भी दी कि उनकी पार्टी मकोका कानून के खिलाफ नहीं है। वह केवल इसका दुरुपयोग किए जाने के खिलाफ है। गौरतलब है कि भाजपा शासित गुजरात और राजस्थान सरकारें मकोका की तर्ज पर अपने यहां भी कानून बनाने की लंबे समय से मांग कर रही हैं, लेकिन केंद्र स्वीकृति नहीं दे रहा है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [एनसीपी] ने मालेगांव विस्फोट की जांच कर रहे मुंबई के आतंकवाद निरोधी दस्ते [एटीएस] के प्रति भाजपा और संघ परिवार के नेताओं द्वारा अपनाए गए रुख को गैर देशभक्त आचरण बताया। एनसीपी के महासचिव डीपी त्रिपाठी ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी और संघ परिवार के नेताओं ने एटीएस की भूमिका के बारे में जो रवैया अख्तियार किया है वह देशभक्तपूर्ण आचरण नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने इस आचरण से भाजपा और संघ परिवार ने देश की कानून प्रणाली पर प्रहार किया है। त्रिपाठी ने कहा कि अनुचित बयानों के जरिए जांच का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभियुक्तों के खिलाफ मकोका के तहत मामला चलाना यही साबित करता है कि एटीएस के पास इन लोगों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य हैं। शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी के नेता ने कहा कि अभी तक एटीएस अच्छा काम कर रही है जिसकी सराहना होनी चाहिए। इसी एटीएस की गुजरात, आंध्र प्रदेश और मध्यप्रदेश में उनके कार्यों के लिए सराहना की गई है। ऐसे में मुंबई एटीएस की ईमानदारी पर शक ज़ाहिर करना उचित नहीं है।

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