
नई दिल्ली। देश के कुछ भागों में चल रही विध्वंसक राजनीति के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक राजनीति को जनता को धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर बांटने की अनुमति किसी कीमत पर नहीं दी जानी चाहिए।
सिंह ने सवाल किया कि हमारे परमाणु अथवा अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को इस संकुचित नज़र से कौन देखता है कि उनकी जाति या आस्था क्या है। हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में उन्होंने जाति या धर्म के आधार पर विभाजनकारी राजनीति को अस्वीकार करने की लोगों से अपील करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों से कौन पूछता है कि उनका धर्म और जाति क्या है। उन्होंने कहा कि उनसे कौन सवाल करता है कि उनकी भाषा क्या है या वे किस क्षेत्र से संबंध रखते हैं। हम उनकी केवल उपलब्धियों के बारे में बात करते हैं। यह उनकी उपलब्धियां हैं जो उनकी पहचान बनाती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक राजनीति को हमारे लोगों को धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर बांटने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। महाराष्ट्र में राज ठाकरे की पार्टी द्वारा उत्तर भारतीयों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और उड़ीसा और कर्नाटक में ईसाइयों पर हुए हमलों के संदर्भ में उनकी यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने प्रश्न किया कि अगर मैं आपमें से हर एक से यह कहूं कि अपनी पहचान इस नजरिए से बनाना बंद करें कि अतीत ने आपको कैसे ढाला, बल्कि यह सोचें कि आप भविष्य को क्या शक्ल दे सकते हैं या दे रहे हैं तो क्या मैं आपसे कुछ ज्यादा मांग कर रहा हूं।