हार पर कार्यकर्ताओं की सुनेगा कांग्रेस आलाकमान

 
Jan 07, 02:18 am

संजय मिश्र, नई दिल्ली। मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में हार से चिंतित कांग्रेस आलाकमान ने नेताओं की बजाय सीधे कार्यकर्ताओं से रूबरू होकर पराजय के कारणों की पड़ताल करने का फैसला किया है। यह कदम दोनों प्रदेशों के पार्टी दिग्गजों के लिए झटका माना जा रहा है। हाल के वर्षो में यह पहला मौका है जब हार पर आलाकमान ने नेताओं से चर्चा करने की बजाय सीधे कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने का निर्णय लिया है।

पार्टी ने इस क्रम में दोनों राज्यों में चुनाव हारने वाले सभी कांग्रेस उम्मीदवारों से चर्चा करने के साथ-साथ डिवीजन स्तर पर सम्मेलन करने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार आलाकमान को इसमें कोई संदेह नहीं रह गया कि मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में प्रदेश के दिग्गजों की गुटबाजी की वजह से कांग्रेस को शिकस्त खानी पड़ी। इसीलिए इन दोनों राज्यों के प्रभारी कांग्रेस महासचिव नारायणस्वामी को कार्यकर्ताओं से सीधे मुखातिब हो पराजय के कारणों की तह तक जाने का निर्देश दिया गया है।

इसके मद्देनजर ही प्रभारी महासचिव ने 10 जनवरी को रायपुर में तथा 11 व 12 जनवरी को भोपाल में दोनों प्रदेशों के सभी पराजित कांग्रेस उम्मीदवारों के साथ चर्चा करने का फैसला किया है। इसमें चुनाव जीतने वाले विधायकों को भी बुलाया जाएगा। विधानसभा चुनाव की हार के बाद कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में मध्यप्रदेश के दिग्गज नेताओं दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ से लेकर सुरेश पचौरी तक के बीच समन्वय नहीं होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी और विद्याचरण शुक्ल के बीच खींचतान किसी से छिपी नहीं है।

कांग्रेस नेतृत्व का साफ मानना है कि 40 लोकसभा सीटों वाले इन दोनों राज्यों की जमीनी हकीकत से रूबरू होकर अगर केवल नेताओं पर भरोसा किया गया तो लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा। उम्मीदवारों से चर्चा के बाद पार्टी मध्यप्रदेश के सभी सात और छत्तीसगढ़ के चार डिवीजनों में कार्यकर्ताओं का सम्मेलन करने का भी फैसला किया है। कांग्रेस नेतृत्व इस बार दोनों राज्यों में भाजपा से ज्यादा नहीं तो कम से कम बराबर सीटें मिलने की उम्मीद कर रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की 11 में से केवल एक सीट कांग्रेस को मिली थी। वहीं मध्यप्रदेश की 29 में से महज 4 लोकसभा सीट ही कांग्रेस के खाते आई थी। इसमें ताजा हार ने पार्टी की उम्मीदों के लिए चुनौती और बढ़ा दी है।




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