नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी [भाजपा] ने बोफोर्स तोप घोटाला मामले में फंसे इतालवी व्यवसाई ओत्तावियो क्वात्रोच्चि के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के रुख को रविवार को 'असंगत' बताया।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री की इस बेतुकी दलील से दुखी है कि अगर क्वात्रोच्चि के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस नहीं हटाई जाती तो भारत को विश्व समुदाय के सामने नीचा देखना पड़ता।
मनमोहन ने कहा था कि क्वात्रोच्चि का मामला भारत सरकार के लिए 'शर्मिंदगी' का विषय बन गया है क्योंकि वह मलेशिया और अर्जेटीना से उसका प्रत्यर्पण कराने में नाकाम रही। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इन मुल्कों की अदालतों ने कहा था कि भारत के पास क्वात्रोच्चि के खिलाफ कोई 'मजबूत मामला' नहीं है।
क्वात्रोच्चि का नाम रेड कार्नर की सूची से हटाने के फैसले को सही ठहराने पर प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए जावडेकर ने कहा कि यह सीबीआई की अक्षम्य हरकत का बचाव करने की ओछी कोशिश है। इससे यह भी साबित होता है कि क्वात्रोच्चि का नाम रेड कार्नर नोटिस की सूची से हटाने का फैसला सीबीआई का अपना निर्णय नहीं बल्कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] सरकार का राजनीतिक फैसला है।
इस मामले की तुलना संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु के मामले से करते हुए जावडेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि देश को दुनिया के सामने नीचा देखने की स्थिति उस वक्त क्यों नहीं पैदा हुई थी, जब उसने गुरु को फांसी पर नहीं लटकाया था। तब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कदम की निन्दा की थी।
'कांग्रेस का हाथ क्वात्रोच्चि और अफजल के साथ' का नया नारा उछालते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि संप्रग वोट बैंक की राजनीति के तहत अफजल को बचाना चाहती है, जबकि क्वात्रोच्चि को बचाने की कोशिश इसलिए की जा रही है, क्योंकि उसका संबंध कांग्रेस के अगुवा परिवार से है।
भाजपा ने पाकिस्तान की स्वात घाटी में तालिबान द्वारा वहां हिन्दुओं और सिखों की हत्या करने और वहां से इन लोगों को पलायन के लिए मजबूर किए जाने पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
जावड़ेकर ने कहा कि हम सरकार से मांग करते हैं कि वह पाकिस्तान में रह रहे भारतीय मूल के लोगों की रक्षा के लिए फौरी कदम उठाए। सरकार पर श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा कई अन्य देशों में भारतवंशी लोगों की सुरक्षा करने में नाकामी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के अब तक के प्रयास सिर्फ तकनीकी ही रहे हैं और उनके कोई ठोस नतीजे सामने नहीं आए हैं।