चुनावी मुद्दों से दूर है किसानों का दर्द

 
May 04, 12:06 am

फर्रुखाबाद [राजेन्द्र कुमार]। फर्रुखाबाद का नाम आये तो सबसे पहले जहन में आलू का ख्याल आता है, क्योंकि यह जिला आलू उत्पादन के मामले में न सिर्फ देश में बल्कि एशिया में अव्वल रहा है। फिर भी इस चुनावी महाभारत में यहां के किसानों की सुध किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी ने नहीं ली है।

यही नहीं इस बार यहां से चुनाव लड़ रहे किसी प्रत्याशी के एजेंडे में आलू किसानों की समस्याओं को लेकर कोई वायदा भी नहीं है। बसपा,कांग्रेस, सपा और भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी अपने भाग्य को अजमाने चुनाव मैदान में उतरे हैं और फर्रुखाबाद संसदीय क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने का वायदा कर रहे हैं। यह दावा भी कर रहे हैं कि चुनाव जीतने के बाद यहां की सभी टूटी-फूटी सड़कों को बनवाने में जुटेंगे। स्कूल बनवायेंगे व बिजली की आपूर्ति का समय बढ़वाने का प्रयास करेंगे।

नेताओं के मुंह से ऐसे वायदों को सुनकर यहां के बड़े आलू कारोबारी अजय गंगवार कहते हैं कि यह वायदे हैं वायदों का क्या। चुनाव जीतते ही नेता फिर यहां विकास कराने के सभी वायदे ठीक उसी तरह से भुला देंगे जैसे बीते 61 साल से उन्होंने किया है।

अजय गंगवार एक राजनीतिक परिवार से तालुक रखते हैं और उनके पिता विधायक भी रह चुके हैं। फिर भी उन्होंने ऐसी तल्ख टिप्पणी क्यों की। इसका खुलासा शहर के विख्यात हकीम बनवारी लाल करते हैं। उनके अनुसार इस शहर से चुनाव जीतकर तमाम लोग केंद्र और राज्य सरकार में मंत्री बने पर शहर की सूरत नहीं बदली। आज भी शहर में बच्चों के लिए बेहतर स्कूल कालेज नहीं है। शहर की सड़कें टूटी हुई हैं।

आलू मंडी में किसानों के लिए किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है और तबाही की कगार पर पहुंच चुके जरदोजी के व्यवसाय को बचाने में कोई राजनीतिक दल पहल नहीं कर रहा है। यहां से चुनाव जीते नेताओं की तकदीर ही बदल गई पर क्षेत्र की जनता गरीब ही रही, जिसके चलते चुनावों में अबकी लोग किसी भी दल के प्रत्याशी के प्रति उत्साह नहीं दिखा रहे हैं।

सपा ने यहां से दो बार जीत का परचम फहरा चुके मौजूदा सांसद चन्द्रभूषण सिंह उर्फ मुन्नू बाबू, भाजपा ने जिले की कायमगंज नगर पालिका की चैयरमैन मिथलेश अग्रवाल व कांग्रेस ने सलमान खुर्शीद को प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा स्वामी साक्षी महराज भी अपनी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के झंडे तले चुनाव मैदान में हैं। यहां चुनाव लड़ रहे 16 प्रत्याशियों में से यह पांच प्रत्याशी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले हैं और लोग उन्हें भलीभांति जानते हैं।

फिर भी उन्हें लेकर इस क्षेत्र की कमालगंज, फर्रुखाबाद, कायमगंज व नये परिसीमन से बनी मोहम्मदाबाद के साथ अलीगंज विधानसभा सीट पर कोई उत्साह नजर नहीं आता। ऐसे में अब हर दल के प्रत्याशी एवं उनके परिजन अपनी-अपनी बिरादरी के लोगों का समर्थन अपने पक्ष में जोड़ने की मुहिम में लग गए हैं और पांचों विधानसभा क्षेत्रों में भीषण गर्मी की परवाह न कर सभाएं करने में जुटे हैं।

इसी के तहत नरेश अग्रवाल के पुत्र नितिन अग्रवाल लोगों को बता रहे हैं कि उनके पिता की जीत से फर्रुखाबाद की तस्वीर बदलेगी। वहीं नरेश के साथ कभी कांग्रेस में रहे सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद यहां के लोगों के बीच यह कह रही हैं फर्रुखाबाद में जो भी विकास कार्य हुए वह उनके पति सलमान खुर्शीद तथा पूर्व राष्ट्रपति स्व.जाकिर हुसैन और खुर्शीद आलम खां की पहल पर ही हुए हैं। अब यह सिलसिला तब और बढ़ेगा जब सलमान साहब फिर से चुनाव जीत कर संसद में पहुंचेंगे। सपा प्रत्याशी चंद्र भूषण के पुत्र सौरभ सिंह राठौर लोगों से कह रहे हैं उनके पिता ने ईमानदारी से क्षेत्र का विकास कराने में रुचि ली है और चुनाव जीतने के बाद फिर इसी तरह क्षेत्र के लोगों की सेवा करेंगे।

भाजपा प्रत्याशी के पुत्र जय कुमार भी इसी तरह अपनी मां के लिए लोगों से वोट मांगने में जुटे हैं और उनको भरोसा है क्षेत्र की जनता शहर के कार्यों को देखकर भाजपा के साथ जुड़ेगी। दूसरी ओर साक्षी महराज को उम्मीद है कि क्षेत्र के लोध मतदाता उनकी नैया पार लगाने में सहायक होंगे और वह फिर से संसद में पहुंचकर नगाड़ा बजायेंगे। नगाड़ा ही उनका यहां चुनाव चिन्ह है।

बसपा, भाजपा, सपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को लेकर उनके परिजनों की इस मेहनत के बाद भी जनता में उत्साह न दिखने पर अब सपा, बसपा, कांग्रेस तथा भाजपा के बड़े नेता और कार्यकर्ता इस चुनावी जंग को जाति व धर्म की ओर मोड़ रहे हैं, जिसके तहत अकबर अहमद डम्पी से लेकर कल्याण सिंह तक यहां मुस्लिम व लोध मतों को बसपा तथा सपा के पक्ष में करने की मुहिम में जुटे हैं।

इन दोनों नेताओं ने अपनी चुनावी सभा में अपनी बिरादरी के लोगों को बसपा व सपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की। इसी के तहत कल्याण सिंह यहां की राजनीति में अहम माने गए मुकेश राजपूत को सपा खेमे में ले आए तो सलमान खुर्शीद भी मुस्लिम समुदाय को अपने साथ लाने में दिन-रात एक कर रहे हैं।

रोचक तो यह है कि बड़े नेताओं की मेहनत में कहीं भी आलू कारोबारियों के हितों को पूरा करने की कोई बात नहीं हो रही है। कोई नेता यह नहीं कर रहा है वह क्षेत्र मेंबने 60 से अधिक कोल्ड स्टोरेज को कम लागत पर चलाने के लिए उन्हें कंट्रोल रेट पर डीजल दिलाने की पहल करेगा या फिर उनको सीएनजी से चलाने के लिए केन्द्र सरकार पर दबाव डालने का कार्य करेगा। यही नहीं यहां के आलू उत्पादक किसानों को अच्छी किस्म के आलू बीज दिलाने तथा आलू के चिप्स आदि बनाने का कारखाना खुलवाने का वायदा भी कोई नहीं कर रहा। यहां की पांचों विधानसभा सीटों पर किसान ही महत्वपूर्ण है।

किसानों की अनदेखी पर कायमगंज क्षेत्र के अब्दुल मजीद कहते हैं कि नेताओं के चुनाव के समय यहां किसानों की बात न करने और मन्दिर-मस्जिद मामले में भाषण देने को लेकर क्षेत्र के लोग खामोश हैं और जो वायदे यहां से लड़ रहे प्रत्याशी कर रहे हैं उनको यहां के किसान, शहरी व आलू कारोबारी महत्व नहीं दे रहे।




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