नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। माओवादियों को आतंकी घोषित करने के केंद्र के फैसले पर सहमति तो दूर, वामदल उन पर पाबंदी लगाए जाने के भी पक्ष में नहीं हैं। राजधानी में चली दो दिन की केंद्रीय समिति की बैठक के बाद सोमवार को माकपा महासचिव प्रकाश करात ने दो टूक कह दिया कि माओवादियों पर पाबंदी लगाने से कोई सकारात्मक नतीजा हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कह दिया कि पार्टी इस समस्या के राजनीतिक हल के पक्ष में है और जरूरत पड़ने पर ही प्रशासनिक दखल होनी चाहिए जैसी कि इस वक्त लालगढ़ में चल रही है।
करात का कहना था कि माओवादियों को उस जनता से अलग-थलग करने की जरूरत है जिसे उन्होंने सहानुभूति के जाल में फांस लिया है। उन्होंने यह भी कह दिया कि ऐसा राजनीतिक तरीके से ही किया जा सकता है। यानी वैचारिक लड़ाई लड़ने की बात करात ने की।
एक तरफ पश्चिम बंगाल में माओवादियों की हिंसात्मक कार्रवाई का शिकार हुए अपने काडरों की सूची जारी करना और फिर ऐसे संगठन को पाबंदी में जकड़े जाने का विरोध करना। माकपा नेता करात के इस रुख में निश्चित तौर पर राजनीतिक संदेश ही छिपा हुआ है। यह माओवादियों पर प्रतिबंध के विरोधी वाममोर्चा के घटक दलों के दबाव का नतीजा तो है ही, लेकिन साथ ही यह उस राजनीतिक संदेश का भी असर है जो माकपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पढ़ लिया है। माकपा को यह एहसास खूब है कि उसके काडरों के बुरे बर्ताव से हलकान बंगाल की आम जनता की हमदर्दी हासिल करने में माओवादी पूरी तरह कामयाब हुए हैं। तभी तो इस बार के चुनाव में अपनी पराजय का कारण माकपा इसे भी मानती है। खुद केंद्रीय समिति ने माना है कि बंगाल में काडरों के व्यवहार में सुधार की जरूरत है क्योंकि उनमें अच्छे बर्ताव की कमी भी माकपा की चुनावी हार का कारण बना। नंदीग्राम गवाह है कि किस तरह काडरों के कारनामों से त्रस्त आम लोगों ने माओवादियों से करीबी बढ़ा ली। जाहिर है दो दिन की केंद्रीय समिति में लालगढ़ मामले पर चर्चा के दौरान करात समेत वरिष्ठ नेताओं ने बंगाल में माओवादियों और आम जनता के बीच बढ़ी इस नजदीकी का 2011 के विधानसभा चुनाव पर पड़ने वाले प्रभाव का अंदाजा लगा लिया। माकपा रणनीतिकारों का मानना है कि माओवादियों पर एकदम सख्त रुख लेकर चलने से राजनीतिक नुकसान वामदलों को ही होगा।
करात ने तो यही संकेत दिए कि जनता के मन से माओवादियों के प्रति सहानुभूति हटाने के मकसद से माकपा इन तत्वों का राजनीतिक तरीके से पर्दाफाश करेगी। सूत्रों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टी के साथ उनकी कथित सांठगांठ को सामने लाकर इस मकसद को और अच्छी तरह हासिल किया जा सकता है। सूबे की जनता के बीच माओवादियों की असलियत पर से परदा उठाने की शुरुआत करात ने आज ही कर दी। उन्होंने कहा कि यह तय है कि माओवादियों के काम आतंकवादियों जैसे ही हैं। लेकिन उसका जवाब राजनीतिक भाषा में देना होगा।
करात ने कहा कि पूरे सूबे में माकपा कार्यकर्ताओं ने माओवादियों को आम जनता से अलग थलग करने का काम शुरू कर दिया है। यह अभियान चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम में माकपा ऐसा नहीं कर पाई थी और वहां मामले ने दूसरा ही रूप ले लिया था।