नई दिल्ली। अपने कथित मुस्लिम विरोधी भाषण को लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के मुख्य कारणों में गिने जाने से परेशान वरुण गांधी ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में स्वयं को एकदम उपेक्षित पाया।
बैठक में केवल उनकी मां मेनका गांधी ही उनका बचाव करतीं दिखीं और अधिकतर लोग उनसे कन्नी काटते नजर आए। वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी तक ने पार्टी के दो मुस्लिम नेताओं मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज़ हुसैन द्वारा वरुण पर किए गए प्रहारों का समर्थन सा करते हुए अपने 'मार्गदर्शन संबोधन' में पार्टीजनों को आगाह किया कि वे हिन्दुत्व की मुस्लिम विरोधी संकीर्ण व्याख्या नहीं करें।
माना जा रहा है आडवाणी ने यह बयान देकर वरुण के भाषण से स्वयं को अलग करने का प्रयास किया है।
दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के ऐन समय हैदराबाद की अपराध जांच प्रयोगशाला ने वरुण के कथित भड़काऊ भाषणों की सीडी की सत्यता के बारे में अपनी रिपोर्ट पीलीभीत प्रशासन को सौंप दी। कहा जाता है कि रिपोर्ट में इस सीडी को सही बताया गया है, जबकि वरुण का दावा है कि 'राजनीतिक साजिश' के तहत सीडी से छेड़-छाड़ की गई है।
नकवी और हुसैन ही नहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और महाराष्ट्र भाजपा के शीर्ष नेता गोपीनाथ मुंडे ने भी बैठक में बेटे के बचाव में मेनका द्वारा कथित रूप से दिए गए इस बयान का विरोध किया कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते।
इन तीनों नेताओं ने कहा कि पार्टी द्वारा यह रुख अपनाना घातक होगा कि एक खास समुदाय ने भाजपा को वोट नहीं दिया इसलिए उसे नजरअंदाज किया जा सकता है।