अहमदाबाद। गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों में राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य लोगों के जुड़े होने के मामले में जिरह की मांग करने वाली एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई को नानावती मेहता आयोग ने सोमवार को 10 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया।
सेवानिवृत्त न्यायधीश जी टी नानावती और अक्षय मेहता की सदस्यता वाले आयोग ने 10 जुलाई तक के लिए इस सुनवाई को स्थगित कर दिया है। गैर सरकारी संगठन 'जन संघर्ष मंच' द्वारा 20 मई की सुनवाई के दौरान किए गए निवेदन का एक लिखित जवाब दाखिल करने के लिए सरकारी वकील टेम्पटन नानावती ने समय मांगा था। इसे ध्यान में रखते हुए इससे संबंधित सुनवाई को 10 जून तक के लिए स्थगित किया गया है।
न्यायमूर्ति नानावती ने कहा कि इस मामले में कोई और स्थगन नहीं दिया जा सकता, क्योंकि पहले की सुनवाई में सरकार ने यह कहते हुए स्थगन की मांग की थी कि महाधिवक्ता सुनवाई के लिए हाजिर होना चाहते हैं। पिछले स्थगन के एक महीना बीत जाने के बाद भी इस मामले में जवाब दाखिल नहीं किए जाने को लेकर उन्होंने सरकारी वकील को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह आयोग के कार्य में देरी करेगा।
गौरतलब है कि इस संगठन ने अपने आवेदन में गुजरात में गोधरा की घटना के बाद वर्ष 2002 के दंगों से जुड़े होने के मामले में मोदी, राज्य के कुछ मंत्रियों, पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों की जिरह की मांग की थी।