नई दिल्ली। केंद्र ने कहा है कि भाकपा माले और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर [एमसीसी] के वर्ष 2004 में आतंकी संगठन के रूप में हुए विलय के बाद किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति से बचने के लिए भाकपा माओवादी को प्रतिबंधित करने का निर्णय किया है।
गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि दो संगठनों भाकपा माले [पीपुल्स वार] और एमसीसी के विलय के बाद भाकपा माओवादी का गठन किया गया था, दो संगठन पहले से ही गैरकानूनी गतिविधियां [निरोधक] कानून के तहत पहले से ही प्रतिबंधित संगठन हैं।
उन्होंने कहा, यह हमेशा आतंकी संगठन रहा है और आज इस संबंध में भ्रम की स्थिति को समाप्त कर दिया गया।
वाम पार्टियों विशेषकर माकपा की ओर से विरोध किए जाने के संबंध में एक प्रश्न के जवाब में चिदंबरम ने कहा वाम पार्टियों का विचार पश्चिम बंगाल सरकार का विचार नहीं है।
उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि देश में अब भी पार्टी और सरकार को अलग करके देखा जाता है। मुझे विश्वास है कि मुख्यमंत्री मामले को देखेंगे और मुझे विश्वास है कि राज्य मंत्री मंडल इस संबंध में उपयुक्त कदम उठाएगा।
सितंबर 2004 में भाकपा माले और एमसीसी ने विलय का निर्णय किया था और भाकपा माओवादी नामक संगठन बनाया था। इस विलय का कुछ लोगों ने विरोध भी किया था और इन दोनों संगठनों के कुछ तत्व अब भी स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं।
भाकपा माओवादी के साथ केंद्र ने अब तक 35 संगठनों को प्रतिबंधित कर रखा है। प्रतिबंधित संगठनों की सूची में लश्कर-ए-तैय्यबा, हिजबुल मुजाहिदीन, लिट्टे और उल्फा शामिल हैं।