
लखनऊ। चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण देने के मामले में भाजपा सांसद वरुण गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे में सरकार ने अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है। यह अभियोजन भाजपा सांसद वरुण गांधी के खिलाफ पीलीभीत के बरखेड़ा थाने में दर्ज मुकदमे के संदर्भ में चलाया जाना है।
राज्य के गृह सचिव महेश गुप्ता ने बताया कि बरखेड़ा थाने में मुकदमा अपराध संख्या 255/09 में 153 ए, 188 और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दर्ज अभियोग में जिला प्रशासन ने अभियोजन चलाने के लिए अनुमति मांगी थी। राज्य सरकार ने सहमति दे दी है। वरुण के बयान को भड़काऊ और भिन्न सम्प्रदायों में विद्वेष फैलाने वाला मानते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमें में यह धारा 153 ए लगाई गई थी।
पीलीभीत प्रशासन ने राज्य सरकार से वरुण गांधी के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति तब मांगी थी, जब चंडीगढ़ सीएफएसएल [केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला] ने यह रिपोर्ट भेज दी थी कि जांच के लिए भेजी गई सीडी व कैसेट में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी। जांच उन कैसेट व सीडी की हुई थी, जिनमें वरुण गांधी का चुनाव प्रचार के दौरान दिया गया भड़काऊ भाषण था।
सनद रहे भड़काऊ बयान देने के आरोप में भाजपा नेता वरुण गांधी के खिलाफ पीलीभीत के बरखेड़ा थाने में बीती 17 मार्च और कोतवाली में 18 मार्च को मुकदमा दर्ज किया गया था। बरखेड़ा में पुलिस ने अपने स्तर पर अभियोग दर्ज किया था जबकि कोतवाली में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर एफआईआर की गई थी। वरुण गांधी ने बरखेड़ा में बीती सात व कोतवाली क्षेत्र में आठ मार्च को चुनावी सभा में भड़काऊ बयान दिए थे। इस मामले में वरुण गांधी को जेल भी जाना पड़ा था और उनके खिलाफ रासुका के तहत कार्यवाही भी की गई थी लेकिन अदालत ने रासुका लगाने के लिए पर्याप्त आधार न मानते हुए इस पर सहमति नहीं दी थी।
पीलीभीत पुलिस ने वरुण गांधी द्वारा दिए गए भाषण के तीन नमूने जांच के लिए भेजे थे। इनमें एक नमूना वायस आफ इंडिया की सीडी, दूसरा एक मोबाइल फोन द्वारा उतारे गए वीडियो की माइक्रो चिप और एक हैंडीकैम द्वारा उतारे गए वीडियो की सीडी शामिल थी। इनकी जांच चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला में कराई गई थी।