
लखनऊ [जाब्यू]। मुख्यमंत्री मायावती ने रेल बजट में उत्तर प्रदेश की उपेक्षा किये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बजट में गरीबों व पिछड़े वर्गो को सहूलियत देने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को लेकर केन्द्र सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया।
रेल बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को उत्तर प्रदेश के बारे में अपनी दोहरी नीति बदलनी चाहिए। बजट में गरीबों को किराये में सिर्फ एक रुपये की छूट दी गई है, जबकि उच्च श्रेणी के किराये में दो फीसदी। जिन 375 स्टेशनों को माडल स्टेशन बनाने की घोषणा की गई है, उनमें उत्तर प्रदेश के बहुत कम स्टेशन हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया कराने की योजना में इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, फैजाबाद, बरेली और झांसी स्टेशनों को शामिल न किया जाना आश्चर्यजनक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2007 में सत्ता संभालते ही उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर एससी-एसटी की बैकलाग रिक्तियां भरने का आग्रह किया था, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने ध्यान नहीं दिया। अब विशेष अभियान चलाकर ऐसी रिक्तियां भरी जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेल बजट में सत्रह नई रेल लाइनें बिछाने का प्रस्ताव किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश से सिर्फ शाहगंज, ऊंचाहार, सुल्तानपुर, अमेठी और सलोन को ही प्रस्तावित किया गया है। प्रदेश के अन्य अनेक महत्वपूर्ण स्थानों के लिए रेल लाइन बिछाने का कोई प्राविधान नहीं किया गया। यह आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य के साथ घोर नाइंसाफी है।
उन्होंने कहा कि बजट में आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं, यात्रियों की सुरक्षा, स्टेशनों पर सफाई, पेयजल सुविधा व अन्य यात्री सुविधाएं बढ़ाने का भी कोई ठोस प्राविधान नहीं किया गया है। इससे रेल यात्रा के दौरान असुरक्षा की भावना से ग्रस्त यात्रियों को घोर निराशा हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलमंत्री ने अपने बजट भाषण में प्रधानमंत्री की 'समावेशी विकास की नीति' का उल्लेख जरूर किया, लेकिन बजट प्रस्तावों में इसकी जरा सी भी झलक नहीं मिलती।