चेन्नई। केंद्रीय मंत्री ए राजा ने अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता के आरोपों को निराधार एवं राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया कि उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश को प्रभावित करने का प्रयास किया था।
राजा ने संवाददाताओं से कहा कि आरोप निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि आप कितनी बार जानना चाहते हैं। जयललिता ने डाक्टर कृष्णमूर्ति और उनके पुत्र एस के श्रीधर को अग्रिम जमानत देने के लिए न्यायाधीश आर रघुपति को फोन करने वाले मंत्री के तौर पर राजा का नाम लिया था।
न्यायाधीश ने 29 जून को खुली अदालत में कहा था कि एक केंद्रीय मंत्री ने मुझसे बातचीत की और याचिकाकर्ताओं को अग्रिम जमानत देने के लिए मुझे प्रभावित करने का प्रयास किया। हालांकि उन्होंने मंत्री के नाम का खुलासा नहीं किया था। उनकी टिप्पणी के बाद देश भर में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई।
यह पूछे जाने पर कि क्या उनका कृष्णमूर्ति के साथ कोई संबंध है, राजा ने पलटकर सवाल किया कि कौन कृष्णमूर्ति? राजा इस सवाल को टाल गए कि वह आरोपों को लेकर जयललिता के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करने का इरादा रखते हैं।
अन्नाद्रमुक प्रमुख ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया था कि वह मंत्री राजा हैं और वह कृष्णमूर्ति से परिचित हैं। जयललिता ने यह भी आरोप लगाया कि कृष्णमूर्ति भी राजा के पैतृक शहर पेराम्बलूर के ही रहने वाले हैं और राजा का ला आफिस कृष्णमूर्ति के मकान में ही है।
पिता पुत्र के खिलाफ सीबीआई ने एक मामला दर्ज किया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पुड्डुचेरी विश्वविद्यालय के एक अधिकारी और एक बिचौलिए की मदद से श्रीधर के अंकपत्र में हेराफेरी का प्रयास किया था।