लखनऊ [जाब्यू]। 'अपर कास्ट' को बसपा से जोड़ने का जिम्मा अब खुद मायावती संभालेंगी। अभी तक अपरकास्ट को बसपा से जोड़ने की जिम्मेदारी सतीश चंद्र मिश्र सम्भाले हुए थे। शनिवार को लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों एवं मंत्रियों की बैठक में बसपा प्रमुख ने कहा कि सतीश मिश्र अब विधिक मामलों के साथ-साथ सरकार एवं संगठन के बीस प्रतिशत काम देखेंगे। मायावती ने साफ किया कि उनके इस निर्णय का अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि सतीश मिश्र का रुतबा कम हुआ है। सतीश मिश्र राज्यसभा के सदस्य बनें रहेंगे और संगठन में भी उनका पद यथावत रहेगा। बसपा प्रमुख ने नसीमुद्दीन से भी मुस्लिम समाज को जोड़ने का कार्य ले लिया है। मुस्लिम समाज को जोड़ने का काम भी वह खुद करेंगी। उन्होंने कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी संगठन और जिन 13 सीटों पर उप चुनाव हो रहा है उनमें से छह सीटों को जिताने की मुहिम में लगेंगे।
बकौल बसपा प्रमुख, ''लोकसभा चुनाव के पहले सतीश मिश्र ने अदालती मामलों पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने के लिए उनसे संगठन का कार्य लिए जाने को कहा था। यदि उस समय वह उनकी बात मानती तो मीडिया इसे गलत तरीके से पेश करता पर अब उनके आग्रह को मानते हुए उन्हें अब पार्टी एवं सरकार के विधिक मामलों पर ध्यान देने को कहा गया है।''
बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि सतीश चन्द्र मिश्रा ने कभी भी अपने लोगों को लालबत्ती दिलाने की सिफारिश उनसे नहीं की। उनके जिन जानने वालों को लालबत्ती दी गयी वह सभी पार्टी से जुड़े थे। सूत्रों के अनुसार बैठक में मायावती ने यह भी खुलासा किया कि लोकसभा चुनाव के बाद बसपा को केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिलता तो सतीश चन्द्र मिश्रा,नसीमुद्दीन सिददीकी और स्वामी प्रसाद मौर्य को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाता। ये तीनों लोग तो उनके साथ केन्द्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनते और इनके सभी के पास महत्वपूर्ण विभाग होते। उत्तर प्रदेश में वह किसी दलित वर्ग के व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री बनातीं और भविष्य में भी यदि कभी केंद्र में बसपा की सरकार बनती है तो दलित वर्ग के व्यक्ति को ही यहां पर मुख्यमंत्री बनाया जायेगा। सूत्रों का कहना है कि यह व्यक्ति कौन होगा, इसका उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया लेकिन यह जरूर कहा कि उसी दलित व्यक्ति को वह प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाएंगी जिसने कभी भी पार्टी नहीं छोड़ी होगी और उसके खिलाफ कभी भी कोई अनुशासनहीनता का मामला नहीं हुआ होगा। अन्य राज्यों के बारे में उन्होंने कहा कि हरियाणा में भजनलाल के परिवार के किसी सदस्य को, उत्तराखण्ड में किसी ब्राहमण को, दिल्ली में मुस्लिम या अपर कास्ट के व्यक्ति को, बिहार में पिछड़े वर्ग, मध्य प्रदेश में एससी एसटी, ओबीसी या अपर कास्ट तथा राजस्थान में जाट वर्ग के व्यक्ति को मुख्यमंत्री के पद पर बिठाया जाएगा।