जी-8 के फरमान से सरकार चिंतित नहीं

 
Jul 13, 05:05 pm

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी पर दस्तखत नहीं करने वाले भारत जैसे मुल्कों को संवदेनशील परमाणु तकनीक से वंचित रखने का औद्योगिक देशों [जी आठ] ने भले ही फैसला कर लिया हो, लेकिन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह भारत और फ्रांस के बीच नाभिकीय ऊर्जा सहयोग पर इसका कोई असर पड़ता नहीं देख रहे हैं। इसका संकेत उन्होंने सोमवार को पेरिस रवाना होने से पहले यह उम्मीद जता कर दे दिया कि उनकी फ्रांस यात्रा दोनों मुल्कों के बीच परमाणु ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सामरिक साझेदारी के लिहाज से मददगार साबित होगी।

जहां फ्रांस और मिस्र के पांच दिवसीय दौरे पर रवाना होते हुए प्रधानमंत्री ने इटली में हुए जी-8 के इस फैसले को हल्के अंदाज में लिया, वहीं राज्यसभा में वित्ता मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इस मामले के मद्देनजर विपक्ष की तरफ से उठाए गए संशय को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह [एनएसजी] से मिली छूट के आधार पर खारिज कर दिया। उन्होंने कह दिया कि परमाणु ऊर्जा सहयोग के मामले में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी [आईएईए] और 45 सदस्यीय एनएसजी को ही अंतिम अधिकार प्राप्त है। भारत ने वहां से स्पष्ट तौर पर छूट हासिल की हुई है। लिहाजा जी-आठ के इस फैसले से चिंता की कोई बात नहीं है। राज्यसभा में भाजपा और वामदलों समेत विपक्षी पार्टियों ने सरकार से जी-8 के इस फैसले पर पूरी सफाई पेश करने को कहा था। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखे प्रहार भी किए। पूरे मामले की जड़ में जी-8 का वह फैसला है जिसमें भारत समेत गैर-एनपीटी देशों को परमाणु संव‌र्द्धन और दोबारा प्रसंस्करण की संवदेनशील तकनीक से वंचित रखने की बात कही गई है।

फ्रांस के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग बढ़ने की उम्मीद जता कर डा. सिंह ने यही संदेश देने की कोशिश की कि पिछले सितंबर में नई दिल्ली के साथ एटमी संधि कर चुके पेरिस को उसे निभाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। भारत को ईएनआर तकनीक हस्तांतरण पर पाबंदी का फरमान सुनाने वाले जी-8 का सदस्य फ्रांस भी है।

दो देशों की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के पहले चरण में मनमोहन सिंह फ्रांस की राजधानी पेरिस में होंगे। सिंह पेरिस में फ्रंास के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इसके बाद वह 15वीं गुट निरपेक्ष शिखर वार्ता में भाग लेने के लिए मंगलवार को मिस्र स्थित शर्म अल शेख के लिए रवाना होंगे। इस दौरान वह पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि गिलानी इस तरह की प्रतिबद्धता जताएंगे कि मुंबई हमलों को अंजाम देने वालों को सजा दी जाएगी और सीमा पार आतंकवाद को रोका जाएगा।

सिंह ने कहा कि दिवंगत प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा गुटनिरपेक्ष आंदोलन की पहल करने के बाद से यह भारतीय विदेश नीति का मूल आधार रहा है। उन्होंने कहा कि 'गुटनिरपेक्षता में अभी भी हमारी पूरी आस्था है। शीत युद्ध के बाद दुनिया में दो सैन्य खेमों वाला परिदृश्य बदल गया और ऐसे में गुट निरपेक्ष आंदोलन ने उभरती विश्व व्यवस्था में नई भूमिका निभाई।'




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