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मप्र. में कौमार्य परीक्षण पर हंगामा

Jul 13, 05:57 pm
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नई दिल्ली। बीते महीने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान लड़कियों के कथित कौमार्य परीक्षण के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। एक ओर जहां इस मुद्दे पर सोमवार को राज्यसभा में भाजपा और कांग्रेस सांसदों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

उधर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह का कोई परीक्षण कराए जाने से इन्कार किया है। चौहान ने कहा कि शहडोल में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान 151 लड़कियों के जिस परीक्षण को तूल दिया जा रहा है, वह कौमार्य परीक्षण नहीं था। मुख्यमंत्री की बात का समर्थन करते हुए शहडोल के जिलाधिकारी नीरज दुबे ने कहा कि परीक्षण यह जानने के लिए किया गया था कि योजना का लाभ उठाने वाली कोई महिला गर्भवती तो नहीं है।

राज्यसभा में कांग्रेस और माकपा सांसदों ने लड़कियों की कथित शारीरिक जांच को शर्मनाक करार देते हुए इसे अमर्यादित और लड़कियों के सम्मान पर आघात बताया। माकपा नेता बृंदा करात ने कहा कि किसी भी लड़की की शारीरिक जांच कराना गलत और अमर्यादित है। ऐसी जांच बच्चियों के मान-सम्मान पर हमला है। भाजपा की नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि ये आरोप गलत और निराधार हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने इस संबंध में राज्य सरकार से जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

संसद में उठा काले हिरणों की मौत का मामला

राज्यसभा में सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने हाल ही में राजस्थान के पशुविहार में भारी बारिश के कारण 75 काले हिरणों की मौत के मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया से मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

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