
मुंबई। चुनावी जंग में कहीं नारे गूंजते हैं तो कहीं गा-बजाकर मतदाताओं को रिझाया जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाताओं तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए शिवसेना कार्टूनों का सहारा ले रही है। बताया जाता है कि शिवसेना द्वारा प्रदर्शित किए जा रहे ये कार्टून उसके सुप्रीमो बाल ठाकरे ने बनाए हैं।
शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे आला दर्जे के कार्टूनिस्ट हैं। राजनीति में आने से पहले मुंबई के कुछ अंग्रेजी दैनिकों में प्रकाशित उनके कार्टून देश में चर्चा का विषय बनते रहे हैं। राजनीति में आने के बाद भी ठाकरे ने अपना संदेश आम जनता तक पहुंचाने के लिए एक कार्टून पत्रिका 'मार्मिक' का प्रकाशन शुरू किया था। बाद में इस पत्रिका की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कार्टूनिस्ट भतीजे राज ठाकरे को सौंप दी थी।
अब चाचा-भतीजे की राजनीतिक राहें अलग होने के बाद चाचा बाल ठाकरे ने एक बार फिर पेंसिल-ब्रश उठा लिया है। लेकिन, इस बार उनके निशाने पर स्वयं उनका भतीजा और कार्टूनकला में उनका शिष्य राज ठाकरे है। शिवसेना द्वारा इन दिनों महाराष्ट्र की जनता के बीच प्रदर्शित किए जा रहे एक कार्टून में एक भारी-भरकम पैर के नीचे एक मराठी व्यक्ति को कुचले जाते दिखाया गया है। इस पैर में बंधी एक पंट्टी में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का पंचरंगी झंडा दिखाया गया है। जिसके नजदीक ही कांग्रेस और राकांपा के प्रतीक दो नेता खड़े हैं, जो मनसे को उकसाने का काम कर रहे हैं। पोस्टर में दूसरी ओर खड़े बाल ठाकरे कुचले जा रहे मराठी व्यक्ति को मनसे से सावधान करते दिखाई दे रहे हैं।
इस कार्टून के जरिए शिवसेना मराठी मतदाताओं को समझाना चाहती है कि वे अपना कीमती मत मनसे को देकर कांग्रेस व राकांपा जैसे दलों को ही लाभ पहुंचाएंगे। गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में मनसे के प्रत्याशियों के कारण शिवसेना-भाजपा को महाराष्ट्र में नौ सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था और इसका सीधा लाभ कांग्रेस-राकांपा को हुआ था। शिवसेना विधानसभा चुनाव में इस प्रकार का नुकसान नहीं उठाना चाहती।
महाराष्ट्र की राजनीति में कार्टूनों के पोस्टर का इस्तेमाल इससे पहले भी होता रहा है। वह भी ठाकरे परिवार के द्वारा ही। 1990 में जब छगन भुजबल शिवसेना के 16 विधायकों के साथ पार्टी तोड़कर कांग्रेस में जा मिले थे तो शिवसेना की छात्र शाखा विद्यार्थी सेना के प्रमुख के रूप में राज ठाकरे ने भुजबल के तरह-तरह के व्यंग्यात्मक कार्टून बनाकर पूरे महाराष्ट्र की दीवारें रंग दी थीं। राज ठाकरे की इसी क्षमता को देखते हुए बाल ठाकरे ने शुरू में राज को अपने उत्ताराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया था। लेकिन, जब उनके पुत्र उद्धव की राजनीतिक रुचि जगी तो उन्होंने राज को शिवसेना की राजनीति से ही बेदखल करना शुरू कर दिया। जिसके फलस्वरूप राज को अपना अलग राजनीतिक दल बनाना पड़ा। मनसे सूत्रों का कहना है कि शिवसेना के कार्टून का जवाब राज ठाकरे भी कार्टून बनाकर दे सकते हैं। लेकिन, वह बाल ठाकरे का सम्मान करते हैं। इसलिए उनकी किसी बात का जवाब देने के लिए वह कोई भी कदम नहीं उठाएंगे।