नई दिल्ली। महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में 13 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार का शोर रविवार को थम गया। इसके साथ ही उम्मीदवारों के व्यक्तिगत तौर पर अपने मतदाताओं से मिलने और घर-घर जाकर प्रचार करने का सिलसिला शुरू हो गया।
लोकसभा चुनाव के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों की लोकप्रियता की कसौटी माने जा रहे इन चुनावों के लिए करीब एक महीने तक चले प्रचार अभियान में कांग्रेस और भाजपा के प्रमुख नेताओं के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव के दौरान कहीं कहीं व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप का तीखा दौर भी चला। कांग्रेस के स्टार प्रचारक पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी महासचिव राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तीनों राज्यों में प्रचार अभियान में हिस्सा लिया।
इन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए जी जान से जुटी हुई है। लोकसभा चुनाव में पराजय का सामना करने के बाद मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी इसे 'करो या मरो' की लड़ाई मान कर कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पार्टी इन चुनावों में विजय पताका फहराकर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं में एक बार फिर विश्वास पैदा करने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली और एम वैंकैया नायडू ने प्रचार में हिस्सा लिया और संप्रग सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कांग्रेस को घेरने का प्रयास किया।
हरियाणा में विकास को आधार बनाकर कांग्रेस दूसरी बार सत्ता पर कब्जा जमाने का प्रयास कर रही है। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली सफलता से उत्साहित राज्य के मुख्यमंत्री भुपेन्द्र सिंह हुड्डा ने निर्धारित समय से कुछ समय पहले ही विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर नया चुनाव कराने का निर्णय किया था। कांग्रेस, गुटबाजी का शिकार भाजपा ्रहरियाणा जनहित कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल [इनेलो] का सूपड़ा साफ कर कर राज्य में अपनी स्थिति को मजबूत करने की पूरी कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष लोकसभा चुनाव में हुए अपने सफाए से उबरने के लिए जी जान से जुटा हुआ है।
महाराष्ट्र में कांग्रेस शरद पावर के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। एनसीपी लोकसभा चुनाव में बहुत ज्यादा सफलता हासिल नहीं कर पाई थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह अपनी स्थिति को मजबूत बनाने में जुटी हुई है। महाराष्ट्र में शिवसेना भाजपा गठबंधन अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहा है। हालांकि शिवसेना के लिए कांग्रेस से कहीं ज्यादा दिक्कत उससे अलग होकर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना [मनसे] का गठन करने वाले राज ठाकरे पैदा कर रहे हैं।
शिवसेना के उद्धव ठाकरे और मनसे के राज ठाकरे के बीच आरोप प्रत्यारोप का तीखा दौर भी चला। अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस अपनी स्थिति को काफी सुरक्षित मान रही है। वहां साठ सदस्यीय विधानसभा के लिए मुख्यमंत्री खांडू दोरजी सहित तीन सदस्य निर्विरोध निर्वाचित कर लिए गए हैं।
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन रविवार को वडगांव-शेरी विधानसभा सीट से भाजपा-शिवसेना प्रत्याशी अजय भोसले पर अज्ञात व्यक्तियों ने गोली चलाई, लेकिन वह बाल-बाल बच गए। गोलीबारी में उनका वाहन चालक घायल हो गया।
भोसले ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे उनके प्रतिद्वंद्वी और राकांपा प्रत्याशी बापू पठारे का हाथ था। हालांकि राकांपा की शहर इकाई के अध्यक्ष जयदेव गायकवाड़ ने इस बात से इनकार किया। कल्याण पश्चिम विधानसभा सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी अलका अवलास्कर पर शनिवार देर रात ठाणे जिले में अज्ञात व्यक्तियों ने हमला किया। इन छिटपुट घटनाओं के बाद चुनाव प्रचार आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा, लेकिन पिछले दिनों नक्सलियों द्वारा महाराष्ट्र में बड़ा हमला कर 17 पुलिसकर्मियों की हत्या किए जाने की घटना ने चुनाव आयोग को शांतिपूर्ण ढंग से मतदान सुनिश्चित करने के लिए सचेत कर दिया है।
महाराष्ट्र में सात करोड़ 56 लाख मतदाता 288 विधायकों का चुनाव करेंगे, जबकि हरियाणा में एक करोड़ बीस लाख से ज्यादा मतदाता विधानसभा के 90 सदस्यों का और अरुणाचल में सात लाख 50 हजार मतदाता 60 विधायकों को चुनने के लिए 13 अक्टूबर को मतदान करेंगे। इन तीनों राज्यों में मतगणना 22 अक्टूबर को होगी।