
नई दिल्ली, [राहुल आनंद]। प्रियरंजन दासमुंशी एक साल पहले जब अस्पताल में भर्ती हुए थे, तब वे संप्रग सरकार में केंद्रीय मंत्री थे। लेकिन अब उनकी पहचान धुंधली होती जा रही है। अस्पताल में वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। अब किसी को उनकी याद तक नहीं आ रही है। उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं आ रहा है, हालांकि उनसे जीवन रक्षक प्रणाली हटा ली गई है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में न्यूरोलाजी विभाग के कंसल्टेंट डा. विनीत सूरी की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। उनकी मानें तो मुंशी की स्थिति में कोई सुधार नहीं है। उन्हें लाइफ सपोर्ट से हटा लिया गया है, वे आंख खोल रहे हैं। उन्हें व्हील चेयर पर रोज घुमाया जाता है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि उन्हें ठीक होने में कितना समय लगेगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री को सांस लेने में तकलीफ के कारण एम्स में 12 अक्टूबर, 2008 को भर्ती कराया गया था। लगभग एक सप्ताह एम्स में चले इलाज से दासमुंशी के परिवार वाले संतुष्ट नहीं थे जिससे उन्हें गत 20 अक्टूबर 2008 अपोलो अस्पताल लाया गया था। एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डा. डीके शर्मा के अनुसार जब उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था तो उनका वेंट्रिकुलर सिस्टम बिल्कुल काम नहीं कर रहा था। हालांकि दासमुंशी को एम्स के अपोलो शिफ्ट किए जाने को लेकर विवाद भी हुआ था। पूर्व केंद्रीय मंत्री की नाजुक हालत को देखते हुए 18 अक्टूबर, 2008 को अमेरिका के हापकिंस यूनिवर्सिटी के न्यूरो विशेषज्ञ डा. डेन हेनली दिल्ली आए। वे दासमुंशी को देखने एम्स पहुंचे। मगर डा. हेनली को एम्स प्रशासन की तरफ से पूरा सहयोग नहीं मिला। इसी कारण उन्हें अपोलो में शिफ्ट किया गया था।