
नई दिल्ली। महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में अगली सरकार किसकी बनेगी यह गुरुवार को तय हो जाएगा। गत 13 अक्टूबर को इन तीनों राज्यों में नई सरकार के गठन के लिए मतदान हुआ था। निर्वाचन आयोग ने 22 अक्टूबर को होने वाली मतगणना के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता राजेश मल्होत्रा ने बताया, 'भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना सुबह आठ बजे शुरू होगी। सूचनाएं वेबसाइट के जरिए उपलब्ध कराने के लिए प्रबंध किए गए है।'
राजनीतिक प्रेक्षकों और चुनाव विशेषज्ञों की महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजों पर खासा नजर है। लगभग 7.6 करोड़ मतदाताओं वाले इस राज्य की कुल 288 विधानसभा सीटों के लिए 3,559 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इनमें महिला उम्मीदवारों की संख्या 211 है।
महाराष्ट्र में मुख्य मुकाबला कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [राकांपा] गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी [भाजपा]-शिव सेना गठबंधन के बीच है। कांग्रेस-राकांपा गठबंधन का पिछले 10 वर्षो से महाराष्ट्र में शासन है। इसके अलावा विभिन्न दलों के बागी नेता भी काफी संख्या में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [मनसे] ने इस दफा पहली बार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया। मनसे के प्रदर्शन पर सभी की नजरें है।
लगभग 1.31 करोड़ मतदाताओं वाले राज्य हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के लिए कुल 1,222 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल, भाजपा और हरियाणा जनहित कांग्रेस [हजकां] के बीच था।
हरियाणा में पिछले पांच वर्षो से कांग्रेस का शासन है। मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने विकास और सुशासन के नाम पर इस बार का विधानसभा चुनाव लड़ा। मुख्यमंत्री के हौंसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने निर्धारित समय से पहले ही विधानसभा भंग करने की सिफारिश की और पहले चुनाव कराए। बहरहाल, गुरुवार को स्पष्ट हो जाएगा कि उनका यह दांव कितना सफल रहा।
अरूणाचल प्रदेश की कुल 60 सीटों वाली विधानसभा की 57 सीटों पर लिए 13 अक्टूबर को मतदान हुआ था। मुख्यमंत्री दोरजी खांडू सहित कांग्रेस के तीन उम्मीदवारों के निर्विरोध चुन लिए जाने की वजह से वहां की 57 सीटों पर मतदान हुआ। खांडू तवांग जिले की मुक्तो सीट से वर्ष 1999 और 2004 में भी निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।
राज्य में कुल 157 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [रांकापा] ने 36, भारतीय जनता पार्टी [भाजपा] ने 22 और तृणमूल कांग्रेस ने 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।
केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] सरकार में कांग्रेस के साथ शामिल राकांपा और तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान यहां कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी।
वर्ष 2004 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां 34 सीटें जीतीं थीं। इसके अलावा निर्दलीयों ने 13, भाजपा ने नौ और राकांपा व अरूणाचल कांग्रेस ने दो-दो सीटों पर जीत हासिल की थी।