
नई दिल्ली। चीन के साथ हाल के दिनों में वाकयुद्ध को तवज्जो नहीं देते हुए भारत ने बुधवार को विश्वास व्यक्त किया कि सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सौहार्द्रपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा।
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सीमा के संबंध में इस तरह की बातें अचानक नहीं आई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी बात पूर्व में भी उठ चुकी हैं। क्योंकि चीन ने 1914 के समय से ही मैकमोहन रेखा को स्वीकार नहीं किया। इस बात पर कि चीन का रुख हाल के दिनों में इस विषय पर सख्त रहा है, जबकि भारत का रुख नरम है। मुखर्जी ने इससे असहमति व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि जब भी वह कोई टिप्पणी करते हैं, हमारी प्रतिक्रिया संतुलित होती है, जैसा होना चाहिए। प्रधानमंत्री के अरुणाचल प्रदेश जाने के बारे में चीन ने पहली बार टिप्पणी नहीं की है और यहां तक उस टिप्पणी के बाद मैं अरुणाचल गया था। वहां से आने के बाद मैंने कहा था कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है। चीन के साथ सीमा से जुड़े प्रश्नों को सुलझाने की संभावना पर प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि बातचीत के जरिए सभी सीमा विवादों का सौहार्द्रपूर्ण ढंग से निपटारा हो जाएगा।
अरुणाचल प्रदेश में एक चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए प्रधानमंत्री की राज्य की यात्रा पर चीन की ओर से आपत्ति पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री सत्ताधारी पार्टी के नेता हैं, इसलिए यह वाजिब है कि वह वहां जाएं और चुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करें। मुखर्जी ने कहा कि समय-समय पर चीन इस अरुणाचल को उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व में भी जब प्रधानमंत्री अरुणाचल गए थे जब उन्होंने चीन टिप्पणी की थी। जब मैं पहली बार तवांग गया था तब भी चीन के कुछ समाचारपत्रों ने ऐसी खबरें प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि भारत के विदेश मंत्री दक्षिणी तिब्बत की यात्रा पर गए।
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर अचानक आई 'कड़वाहट' के कारण बताते हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मैं कहूंगा कि यह अचानक नहीं है। क्योंकि 1914 के बाद से चीन ने कभी भी मैकमोहरन रेखा को स्वीकार ही नहीं किया। प्रणव मुखर्जी ने कहा कि चीन इसका कल भी विरोध किया था और वह बाद में भी इसका विरोध कर रहे हैं। चीन का अरुणाचल प्रदेश पर सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि उपनिवेशवादी काल से ही राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र बनने के बाद अरुणाचल प्रदेश नियमित रूप से संसद में अपने प्रतिनिधि भेजता रहा है।
मुखर्जी ने कहा कि अब सभी लोगों को टिप्पणी करने की स्वतंत्रता है, लेकिन जहां तक अंतरराष्ट्रीय कानून के मानदंड और चलन का प्रश्न है। हम वैसे ही प्रतिक्रिया देते हैं जैसे दिया जाना चाहिए और इस हिसाब से हमने प्रतिक्रिया व्यक्त की है।