
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। बलूचिस्तान, आतंकवाद और कश्मीर को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की पाकिस्तान को फटकार के बाद भारत ने भी उसे कड़ी चेतावनी दे दी। गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दो टूक कह दिया कि 'पाकिस्तान तत्काल भारत के मामले में दखल बंद कर दे और अगर पड़ोस से फिर कोई आतंकी हमला हुआ तो उस पर कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।'
मुंबई कांड पर पाक की आनाकानी पर निराशा जताने तक ही सीमित रहने वाले गृह मंत्री का गुस्सा 26/11 को लेकर भी फूटा। उन्होंने कह दिया कि 'पाक, भारत के साथ खेल खेलना छोड़े और मुंबई कांड अंतिम खेल होना चाहिए। यानी चिदंबरम ने पाक के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का भी संकेत देने की कोशिश की।
मुंबई हमले पर पाक से कार्रवाई की मांग करने तक ही सीमित रहने वाले चिदंबरम का कड़ा बयान कूटनीतिक लिहाज से काफी अहम है। दरअसल, बलूचिस्तान, कश्मीर और अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों को लेकर हिलेरी की फटकार के बाद पाकिस्तानी खेमे में छाई घोर निराशा को भारतीय खेमा पाक पर दबाव बनाने के लिए अच्छा मौका मान रहा है।
साथ ही इसे अमेरिका को भी यह संदेश देने का सुनहरी मौका माना जा रहा है कि पाक सिर्फ अल कायदा को ही सरंक्षण नहीं दे रहा बल्कि भारत में आतंक के खेल की साजिश अभी भी रच रहा है। यही वजह है कि आतंक के लिए सीधे-सीधे पाक पर निशाना साध कर चिदंबरम ने यही इशारा करने की कोशिश की है कि इस्लामाबाद में सरकारी तंत्र भी आतंकियों को पनाह दे रहा है। यह तय है कि देश की अहम खुफिया एजेंसियों पर नियंत्रण रखने वाले मंत्रालय के मुखिया की तरफ से आए बयानों को ठोस जानकारी के आधार पर ही माना जाएगा।
गौरतलब है कि कश्मीर मसले में मध्यस्थता करने के पाक के प्रस्ताव को हिलेरी ने नकार दिया था। साथ ही अमेरिकी मंत्री ने पाक की यह बात मानने से भी इन्कार कर दिया था कि आतंकवाद की समस्या कश्मीर की गुत्थी सुलझने के बाद ही हल हो पाएगी। एक तरफ कश्मीर में आतंक का खेल और चीन जैसे ताकतवर मुल्कों की मदद से अस्थिरता फैलाना, दूसरी ओर इस समस्या को अमेरिका के समक्ष कुछ और तरह से पेश करना। यहां तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के वार्ता प्रस्ताव का जवाब भी उनके पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी ने कश्मीर मामले को लपेटकर ही दिया था। उन्होंने झट कह दिया था कि इस मुद्दे को भी बातचीत में शामिल करना चाहिए।
मुंबई हमले की जांच पर पाक की नाकामी से नाराज भारतीय नेतृत्व को यह नागवार गुजर रहा था। खासकर दो दिन पहले कश्मीर में पाक की शह पर आतंकी घुसपैठ की आशंका जता चुके चिदंबरम तो इसका जवाब देने का मौका तलाश रहे थे। भारतीय कूटनीतिकार मानते हैं कि अल कायदा से पाक की हमदर्दी की ओर इशारा कर रहे अमेरिका के गले यह उतारने का सही वक्त आ गया है कि उसका रुख लश्कर जैसे आतंकी संगठनों के प्रति भी अल कायदा जैसा ही है।
ऐसी बातें ना करें: पाक
नई दिल्ली। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान पर नाराजगी जाहिर की है। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने कहा, 'भारत आतंकवाद के खिलाफ यद्ध में पाकिस्तान की भूमिका से भलीभांति परिचित है। इसलिए सार्वजनिक रूप से उसका यह बयान बेमानी है।'
भारतीय टीवी चैनल से बातचीत के दौरान चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए बासित ने कहा, भारत को ऐसे सार्वजनिक बयानों से बचना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में ऐसे बयानों का कोई लेना-देना नहीं है। यदि भारत सही मायनों में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गंभीर है तो उसे हमारे सुझाव और प्रस्ताव पर अमल करते हुए आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त तंत्र विकसित करना चाहिए।